CBSE Class 12 Economics: Chapter 5 Market Equilibrium NCERT Solutions
This chapter delves into the fundamental concept of Market Equilibrium in Economics for Class 12 students. It explains how the forces of demand and supply interact to determine the equilibrium price and quantity in a market. The solutions cover scenarios of excess demand (shortage) and excess supply (surplus) when the market price deviates from the equilibrium level. It also details the price determination process in a perfectly competitive market with a fixed number of firms. These NCERT Solutions provide clear, step-by-step explanations and graphical representations, aiding students in grasping complex market dynamics and preparing effectively for their examinations.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Economics. |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. बाज़ार संतुलन |
Chapter summary
Chapter 5, 'Market Equilibrium,' focuses on how market demand and market supply interact to establish an equilibrium price and quantity. The solutions explain the concepts of excess demand and excess supply, detailing the market adjustments that occur when prices are above or below equilibrium. It also illustrates the price determination mechanism in a perfectly competitive market with a fixed number of firms, using graphical analysis. This chapter is crucial for understanding the core functioning of markets.
Learning outcomes
- Understand the concept of market equilibrium.
- Explain the conditions leading to excess demand (shortage).
- Explain the conditions leading to excess supply (surplus).
- Describe how market forces restore equilibrium price.
- Analyze price determination in a perfectly competitive market with a fixed number of firms.
Topics covered
Paper topics
- Market Equilibrium
- Demand Curve
- Supply Curve
- Equilibrium Price
- Equilibrium Quantity
- Excess Demand (Shortage)
- Excess Supply (Surplus)
- Price Adjustment Mechanism
- Perfect Competition
- Price Determination
Important topics
- Market Equilibrium
- Excess Demand and Excess Supply
- Price Determination in Perfectly Competitive Markets
- Interaction of Demand and Supply
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
माँग वक्र (Demand Curve) सामान्यतः नीचे की ओर ढलान वाला होता है, जो वस्तु की कीमत और उसकी माँगी गई मात्रा के बीच ऋणात्मक संबंध को दर्शाता है (माँग का नियम)। इसके विपरीत, पूर्ति वक्र (Supply Curve) सामान्यतः ऊपर की ओर ढलान वाला होता है, जो वस्तु की कीमत और उसकी पूर्ति की गई मात्रा के बीच धनात्मक संबंध को दर्शाता है (पूर्ति का नियम)।
जब माँग वक्र (DD) और पूर्ति वक्र (SS) एक दूसरे को एक बिंदु पर काटते हैं, तो बाज़ार संतुलन में होता है। इस संतुलन बिंदु पर, माँग की गई मात्रा (Dn) पूर्ति की गई मात्रा (Sn) के बराबर होती है। इस बिंदु के संगत कीमत OP संतुलन कीमत कहलाती है और संगत मात्रा OQ संतुलन मात्रा कहलाती है।
यदि बाज़ार कीमत संतुलन कीमत OP से कम होती है, तो वस्तु की माँग उसकी पूर्ति से अधिक हो जाती है, जिसे 'अधिमाँग' (Excess Demand) या 'अभावी पूर्ति' (Shortage) कहते हैं।
यदि बाज़ार कीमत संतुलन कीमत OP से अधिक होती है, तो वस्तु की पूर्ति उसकी माँग से अधिक हो जाती है, जिसे 'अधिपूर्ति' (Excess Supply) या 'अभावी माँग' (Surplus) कहते हैं।
चित्र में, DD माँग वक्र है और SS पूर्ति वक्र है। ये दोनों वक्र बिंदु E पर मिलते हैं, जो संतुलन बिंदु है। इस बिंदु पर संतुलन कीमत OP और संतुलन मात्रा OQ है।
प्रश्न 2
प्रश्न 3
प्रश्न 4
- यदि बाज़ार कीमत संतुलन कीमत से अधिक है:
जब बाज़ार में प्रचलित कीमत संतुलन कीमत से अधिक होती है, तो वस्तु की माँग की गई मात्रा उसकी पूर्ति की गई मात्रा से कम होती है। इसके परिणामस्वरूप, बाज़ार में 'अधिपूर्ति' (Excess Supply) उत्पन्न होती है।
इस अधिपूर्ति के कारण विक्रेता अपनी अतिरिक्त वस्तुओं को बेचने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इस प्रतिस्पर्धा के कारण विक्रेता कीमत कम करने को तैयार हो जाते हैं। जैसे-जैसे कीमत कम होती है, माँग की मात्रा विस्तृत (expand) होती है और पूर्ति की मात्रा संकुचित (contract) होती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि बाज़ार कीमत पुनः संतुलन कीमत तक नहीं पहुँच जाती और अधिपूर्ति समाप्त नहीं हो जाती।
- यदि बाज़ार कीमत संतुलन कीमत से कम हो:
जब बाज़ार में प्रचलित कीमत संतुलन कीमत से कम होती है, तो वस्तु की माँग की गई मात्रा उसकी पूर्ति की गई मात्रा से अधिक होती है। इसके परिणामस्वरूप, बाज़ार में 'अधिमाँग' (Excess Demand) उत्पन्न होता है।
इस अधिमाँग के कारण क्रेता वस्तु प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इस प्रतिस्पर्धा के कारण क्रेता अधिक कीमत देने को तैयार हो जाते हैं। जैसे-जैसे कीमत बढ़ती है, माँग की मात्रा संकुचित (contract) होती है और पूर्ति की मात्रा विस्तृत (expand) होती है। यह प्रक्रिया तब तक जारी रहती है जब तक कि बाज़ार कीमत पुनः संतुलन कीमत तक नहीं पहुँच जाती और अधिमाँग समाप्त नहीं हो जाता।
प्रश्न 5
एक पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में जहाँ फर्मों की संख्या स्थिर होती है, कीमत का निर्धारण माँग (Demand) और पूर्ति (Supply) की शक्तियों के परस्पर क्रिया द्वारा होता है।
माँग वक्र (DD): यह वस्तु की विभिन्न कीमतों पर उपभोक्ताओं द्वारा माँगी जाने वाली मात्रा को दर्शाता है। यह सामान्यतः नीचे की ओर ढलान वाला होता है, जिसका अर्थ है कि कीमत कम होने पर माँग बढ़ती है और कीमत बढ़ने पर माँग घटती है।
पूर्ति वक्र (SS): यह वस्तु की विभिन्न कीमतों पर उत्पादकों (फर्मों) द्वारा पूर्ति की जाने वाली मात्रा को दर्शाता है। यह सामान्यतः ऊपर की ओर ढलान वाला होता है, जिसका अर्थ है कि कीमत बढ़ने पर पूर्ति बढ़ती है और कीमत कम होने पर पूर्ति घटती है।
संतुलन कीमत का निर्धारण: बाज़ार संतुलन उस बिंदु पर स्थापित होता है जहाँ माँग वक्र (DD) और पूर्ति वक्र (SS) एक दूसरे को काटते हैं। इस बिंदु को संतुलन बिंदु (E) कहा जाता है। इस बिंदु पर, माँग की गई मात्रा (Qd) पूर्ति की गई मात्रा (Qs) के बराबर होती है।
इस संतुलन बिंदु (E) के संगत जो कीमत होती है, उसे संतुलन कीमत (OP) कहा जाता है, और जो मात्रा होती है, उसे संतुलन मात्रा (OQ) कहा जाता है।
यदि बाज़ार कीमत संतुलन कीमत से भिन्न होती है, तो बाज़ार में या तो अधिमाँग (माँग > पूर्ति) या अधिपूर्ति (पूर्ति > माँग) की स्थिति उत्पन्न होती है, और बाज़ार की अंतर्निहित शक्तियाँ (कीमत समायोजन) कीमत को वापस संतुलन स्तर पर ले आती हैं।
Common mistakes
- Confusing excess demand with excess supply.
- Incorrectly identifying the impact of price changes on quantity demanded and supplied.
- Not fully explaining the adjustment process when the market is not in equilibrium.
- Misinterpreting graphical representations of market equilibrium.
Revision tips
- Clearly define market equilibrium and the conditions under which it occurs.
- Draw and interpret the demand and supply curves to understand equilibrium.
- Explain the concepts of excess demand and excess supply with examples.
- Practice explaining how price adjustments lead back to equilibrium.
- Review the graphical analysis for price determination in a competitive market.
Practice MCQs
Q1. बाज़ार संतुलन की स्थिति कब उत्पन्न होती है?
Explanation: बाज़ार संतुलन तब होता है जब किसी विशेष कीमत पर, वस्तु की माँग की गई मात्रा, उस वस्तु की पूर्ति की गई मात्रा के ठीक बराबर होती है।
Q2. यदि बाज़ार कीमत संतुलन कीमत से अधिक है, तो क्या स्थिति उत्पन्न होगी?
Explanation: जब बाज़ार कीमत संतुलन कीमत से अधिक होती है, तो वस्तु की पूर्ति उसकी माँग से अधिक हो जाती है, जिससे अधिपूर्ति की स्थिति उत्पन्न होती है।
Q3. अधिमाँग (Excess Demand) की स्थिति में क्या होता है?
Explanation: अधिमाँग तब होता है जब किसी वस्तु की माँग की गई मात्रा उसकी पूर्ति की गई मात्रा से अधिक होती है, जो आमतौर पर संतुलन कीमत से कम कीमत पर होता है।
Q4. पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में कीमत का निर्धारण कैसे होता है?
Explanation: पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में, कीमत का निर्धारण उस बिंदु पर होता है जहाँ माँग वक्र और पूर्ति वक्र एक दूसरे को काटते हैं, जिससे संतुलन कीमत और मात्रा तय होती है।
Q5. जब बाज़ार में अधिपूर्ति होती है, तो विक्रेता क्या करते हैं?
Explanation: अधिपूर्ति की स्थिति में, विक्रेता अपनी वस्तुएँ बेचने के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे वे कीमत कम करने को तैयार हो जाते हैं।
Frequently asked questions
बाज़ार संतुलन (Market Equilibrium) क्या है?
बाज़ार संतुलन वह स्थिति है जहाँ किसी वस्तु की माँग की गई मात्रा, उसकी पूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है। इस बिंदु पर कीमत स्थिर रहती है।
अधिमाँग (Excess Demand) कब होता है?
अधिमाँग तब होता है जब किसी वस्तु की माँग उसकी पूर्ति से अधिक होती है, जो आमतौर पर संतुलन कीमत से कम कीमत पर होता है।
अधिपूर्ति (Excess Supply) कब होती है?
अधिपूर्ति तब होती है जब किसी वस्तु की पूर्ति उसकी माँग से अधिक होती है, जो आमतौर पर संतुलन कीमत से अधिक कीमत पर होती है।
बाज़ार में कीमत संतुलन से विचलित होने पर क्या होता है?
यदि कीमत संतुलन से अधिक है, तो अधिपूर्ति होती है और कीमत कम होने लगती है। यदि कीमत संतुलन से कम है, तो अधिमाँग होता है और कीमत बढ़ने लगती है, जिससे बाज़ार पुनः संतुलन की ओर बढ़ता है।
स्थिर फर्मों वाली पूर्ण प्रतिस्पर्धी बाज़ार में कीमत कैसे तय होती है?
माँग और पूर्ति वक्र जहाँ एक दूसरे को काटते हैं, उस बिंदु पर संतुलन कीमत निर्धारित होती है। इस बिंदु पर माँग की गई मात्रा पूर्ति की गई मात्रा के बराबर होती है।
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