CBSE Class 9 Hindi Sparsh Chapter 4: Sharad Joshi - NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 4 of the CBSE Class 9 Hindi Sparsh textbook, authored by Sharad Joshi. The chapter delves into the nuances of hosting guests, exploring the delicate balance between hospitality and the strain an extended stay can place on relationships and resources. It covers the initial warmth of a guest's arrival, the gradual shift in atmosphere as the stay prolongs, and the eventual discomfort and boredom that can set in. The solutions explain the author's feelings about the guest's prolonged stay, the economic implications, and the transformation of polite interactions into strained silences. These solutions are designed to help students grasp the underlying themes and prepare effectively for their exams.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
SubjectHindi Sparsh
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 4

Chapter summary

Chapter 4 of Hindi Sparsh for Class 9, by Sharad Joshi, focuses on the social dynamics of hosting guests. The NCERT Solutions cover the initial courteous reception of a guest, the subtle changes in hospitality as the guest overstays, and the resulting awkwardness and strain on the host's resources and relationships. The solutions analyze the author's perspective on the guest's prolonged presence, the economic burden, and the evolution of interactions from warmth to indifference. This chapter's exercises help students understand the importance of timely departures and the impact of guests on household harmony.

Learning outcomes

  • Understand the social etiquette related to hosting guests.
  • Analyze the changing dynamics of relationships when a guest overstays.
  • Identify the economic and emotional impact of unexpected long-term guests.
  • Interpret the author's feelings and satirical tone regarding the guest's prolonged stay.
  • Explain the concept of 'Atithi Devo Bhava' in the context of modern hospitality.

Topics covered

Paper topics

  • Guest Etiquette
  • Hospitality
  • Relationship Dynamics
  • Social Satire
  • Author's Perspective
  • Economic Impact of Guests
  • Changing Social Norms
  • Time and Patience
  • The concept of 'Atithi Devo Bhava'

Important topics

  • The changing nature of hospitality with prolonged stays
  • The author's satirical commentary on guest behavior
  • The emotional and economic strain on hosts
  • The difference between initial welcome and eventual boredom
  • Interpreting literary statements within context

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखक के घर अतिथि कितने दिनों से अधिक समय तक रह रहा है?
Solution: अतिथि लेखक के घर पर चार दिनों से अधिक समय से रुका हुआ है। यह अवधि लेखक के लिए असहजता का कारण बनने लगी थी, क्योंकि मेहमाननवाज़ी की सीमाएँ पार होने लगी थीं।

प्रश्न 2

कैलेंडर की तारीखें किस तरह फड़फड़ा रही हैं?
Solution: कैलेंडर की तारीखें अपनी निर्धारित सीमा में, एक प्रकार की नम्रता के साथ फड़फड़ा रही थीं। यह वर्णन समय के धीमे बीतने और अतिथि के लंबे ठहराव से उत्पन्न होने वाली बेचैनी को दर्शाता है।

प्रश्न 3

पति-पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया?
Solution: पति ने स्नेह से भरी मुस्कान के साथ अतिथि को गले लगाकर उनका स्वागत किया, जबकि पत्नी ने आदरपूर्वक नमस्ते करके उनका अभिनंदन किया। यह स्वागत मेहमाननवाज़ी की शुरुआत को दर्शाता है।

प्रश्न 4

दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा प्रदान की गई?
Solution: दोपहर के भोजन को एक शानदार 'लंच' का रूप देकर विशेष गरिमा प्रदान की गई। यह अतिथि के प्रति प्रारंभिक उत्साह और आदर को व्यक्त करने का एक तरीका था।

प्रश्न 5

तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?
Solution: तीसरे दिन सुबह अतिथि ने कपड़े धुलवाने की आवश्यकता जताते हुए धोबी के बारे में पूछताछ की। यह संकेत था कि वह अभी भी रुकने का इरादा रखता है, जिससे लेखक की चिंता बढ़ गई।

प्रश्न 6

सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर क्या हुआ?
Solution: जब सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो गई, तो मेहमाननवाज़ी में कमी आने लगी। लंच और डिनर जैसे भव्य भोजन की जगह सादी खिचड़ी बनने लगी। सौहार्दपूर्ण बातचीत की जगह चुप्पी छा गई और धीरे-धीरे यह स्थिति बोरियत में बदलने लगी। यदि अतिथि और रुकता तो शायद उपवास की नौबत आ जाती।

प्रश्न 7

लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
Solution: लेखक चाहता था कि अतिथि को एक भावभीनी और सम्मानजनक विदाई मिले। वह और उसकी पत्नी अतिथि को स्टेशन तक छोड़ने जाना चाहते थे, ताकि अतिथि के मन में उनके प्रति अच्छा अनुभव बना रहे। हालाँकि, अतिथि के लंबे ठहराव के कारण यह इच्छा पूरी नहीं हो पाई।

प्रश्न 8

अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया।
Solution: जब लेखक ने अनपेक्षित अतिथि को अपने घर पर आते देखा, तो उसे तुरंत यह आभास हो गया कि उसके खर्चों में वृद्धि होगी। बटुआ काँपने का यह मुहावरेदार प्रयोग इसी आर्थिक चिंता को दर्शाता है, जो अतिथि के आने से उत्पन्न हुई थी।

प्रश्न 9

अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है।
Solution: इस कथन का अर्थ है कि अतिथि का स्वागत देव तुल्य सत्कार से होता है, लेकिन यह सत्कार केवल कुछ समय तक ही सीमित रहता है। जब अतिथि बहुत दिनों तक रुक जाता है, तो उसका देवत्व समाप्त हो जाता है और वह सामान्य मानव जैसा लगने लगता है। यदि वह और भी अधिक समय तक रुके, तो मेजबान के लिए वह कष्टप्रद और राक्षस तुल्य हो सकता है, जिससे मेजबान की सहनशीलता की परीक्षा होती है।

प्रश्न 10

लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने न दौड़ें।
Solution: इस पंक्ति का आशय यह है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने घर को सुख-शांति और आनंद का स्थान बनाए रखना चाहता है। अनचाहे या अत्यधिक लंबे समय तक रुकने वाले अतिथि इस घरेलू सुख और शांति को भंग कर सकते हैं, जिससे घर का वातावरण असहज हो जाता है। इसलिए, लोगों को दूसरों के घर की इस मिठास को भंग करने के लिए नहीं दौड़ना चाहिए।

प्रश्न 11

मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी।
Solution: लेखक यह कह रहा है कि अतिथि के चार दिन रुकने के बाद, पाँचवें दिन की सुबह उसकी सहनशीलता की अंतिम सीमा होगी। यदि अतिथि उस सुबह भी नहीं जाता है, तो लेखक अपनी मेहमाननवाज़ी की मर्यादा भूलकर कुछ अप्रिय कह सकता है या कर सकता है, क्योंकि वह अतिथि के लंबे ठहराव से अत्यधिक परेशान हो चुका है।

प्रश्न 12

एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते।
Solution: इस कथन का तात्पर्य है कि यदि अतिथि को देवता मानकर उसका सत्कार किया जाए, तो यह सत्कार थोड़े समय के लिए ही उचित है। लंबे समय तक रुकने पर अतिथि का देवत्व समाप्त हो जाता है और वह सामान्य मनुष्य की तरह व्यवहार करने लगता है। देवता का स्थान पूज्यनीय होता है और वे अधिक समय तक सामान्य मनुष्यों के बीच नहीं टिकते, क्योंकि उनका अलौकिक स्वरूप सामान्य जीवन में घुलमिल नहीं पाता।

प्रश्न 13

कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
Solution: अप्रत्याशित आघात अतिथि का चार दिन तक न जाना था। इसका लेखक पर गहरा प्रभाव पड़ा। लेखक ने अतिथि से मुस्कुराकर बात करना बंद कर दिया, बातचीत के विषय समाप्त हो गए और सौहार्दपूर्ण व्यवहार बोरियत में बदल गया। मधुर संबंध कटुता में परिवर्तित होने लगे। सत्कार की ऊष्मा पूरी तरह समाप्त हो गई और लेखक अतिथि को 'गेट आउट' कहने तक की स्थिति में पहुँच गया।

प्रश्न 14

'संबंधों का संक्रमण के दौर से गुज़रना' – इस पंक्ति से आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।
Solution: 'संबंधों का संक्रमण के दौर से गुज़रना' का अर्थ है कि रिश्तों में एक अवस्था से दूसरी अवस्था में परिवर्तन आना। जब अतिथि पहली बार आया, तो लेखक और उसके परिवार के संबंध सौहार्दपूर्ण और आत्मीय थे। उन्होंने अतिथि का खुशी से स्वागत किया, शानदार डिनर कराया और सिनेमा दिखाया। लेकिन, अतिथि के चार-पाँच दिन रुक जाने के बाद, वही संबंध धीरे-धीरे घृणा, तिरस्कार और बोरियत में बदलने लगे। यह रिश्तों में आया एक नकारात्मक परिवर्तन था, जिसे संक्रमण काल कहा गया है।

Common mistakes

  • Confusing the author's satirical tone with literal statements.
  • Underestimating the economic and emotional strain of hosting.
  • Not recognizing the subtle shifts in hospitality and relationship dynamics.
  • Interpreting the guest's actions as purely negative without considering the host's perspective.

Revision tips

  • Read the chapter carefully to understand the author's subtle humor and critique.
  • Focus on the progression of events and the changing atmosphere as the guest stays longer.
  • Analyze the meaning of each quoted statement in the context of the story.
  • Practice explaining the author's feelings and the underlying message of the chapter.
  • Discuss the concept of hospitality and its limits with classmates.

Practice MCQs

Q1. अतिथि लेखक के घर कितने दिनों से अधिक समय तक रुका हुआ था?

Q2. कैलेंडर की तारीखें किस प्रकार फड़फड़ा रही थीं?

Q3. तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या पूछा?

Q4. सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर भोजन में क्या बदलाव आया?

Q5. लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

ये समाधान सीबीएसई कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 4 पर केंद्रित हैं।

अध्याय 4 का मुख्य विषय क्या है?

अध्याय 4 अतिथि सत्कार, मेहमानों के लंबे समय तक रुकने से उत्पन्न होने वाली सामाजिक और भावनात्मक जटिलताओं, और लेखक के व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण पर केंद्रित है।

क्या ये समाधान मूल प्रश्न प्रारूप को बनाए रखते हैं?

हाँ, सभी प्रश्न मूल स्रोत से लिए गए हैं और समान रखे गए हैं, केवल समाधानों को स्पष्टता और विस्तार के लिए फिर से लिखा गया है।

इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?

ये समाधान अध्याय की मुख्य अवधारणाओं को समझने, लेखक के दृष्टिकोण का विश्लेषण करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने का अभ्यास करने में मदद करते हैं।

लेखक अतिथि के बारे में क्या महसूस करता है जब वह लंबे समय तक रुकता है?

जब अतिथि लंबे समय तक रुकता है, तो लेखक का प्रारंभिक सत्कार धीरे-धीरे बोरियत और असहजता में बदल जाता है, और वह अतिथि के जाने की कामना करने लगता है।

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