कक्षा 10 हिंदी क्षितिज अध्याय 12: लखनवी अंदाज़ - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 10 की हिंदी पुस्तक 'क्षितिज भाग 2' के अध्याय 12, 'लखनवी अंदाज़' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। लेखक यशपाल द्वारा लिखित यह व्यंग्यात्मक निबंध, उस समय के समाज में व्याप्त झूठी शान और आडंबर पर प्रकाश डालता है। समाधानों में नवाब साहब के व्यवहार, खीरे को खाने की उनकी अनोखी विधि और लेखक की प्रतिक्रिया का विश्लेषण शामिल है। यह खंड छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, पात्रों के इरादों को समझने और भाषा के प्रयोग पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन हैं, जो छात्रों को पाठ की मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करने और महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
SubjectHindi Kshitiz
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 12

Chapter summary

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के अध्याय 12, 'लखनवी अंदाज़' के NCERT समाधान, यशपाल द्वारा लिखित इस व्यंग्यात्मक निबंध पर केंद्रित हैं। ये समाधान नवाबों के झूठे अभिमान, दिखावटी व्यवहार और सामाजिक आडंबरों का विश्लेषण करते हैं। इसमें नवाब साहब द्वारा खीरे को खाने की तैयारी और फिर उसे फेंक देने की क्रिया के माध्यम से उनके चरित्र और समाज पर कटाक्ष को समझाया गया है। छात्रों को पाठ के मुख्य विचारों, पात्रों के चित्रण और भाषा के प्रयोग को समझने में मदद करने के लिए विस्तृत उत्तर प्रदान किए गए हैं।

Learning outcomes

  • लेखक को नवाब साहब के हाव-भावों से उनके अनमनेपन को समझने की क्षमता विकसित करना।
  • नवाब साहब द्वारा खीरे को फेंक देने के पीछे के कारणों और उनके स्वभाव का विश्लेषण करना।
  • बिना विचार, घटना और पात्रों के कहानी लेखन की संभावना पर लेखक के विचार को समझना।
  • निबंध के लिए वैकल्पिक शीर्षक सुझाने और उसके औचित्य को स्पष्ट करना।
  • नवाब साहब द्वारा खीरे को तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त करना।
  • दिए गए वाक्यों में क्रियापदों को पहचानना और उनके भेदों का निर्धारण करना।

Topics covered

Paper topics

  • लखनवी अंदाज़ का सारांश
  • नवाब साहब का चरित्र चित्रण
  • लेखक यशपाल का व्यंग्य
  • खीरे को खाने की विधि का विश्लेषण
  • सामाजिक आडंबर और झूठी शान
  • नई कहानी आंदोलन
  • क्रिया के भेद (सकर्मक, अकर्मक)
  • वाक्य विश्लेषण
  • पाठ के प्रश्नोत्तर
  • अभिव्यक्ति और रचना

Important topics

  • नवाब साहब के व्यवहार का व्यंग्यात्मक विश्लेषण
  • सामाजिक आडंबर और झूठी शान पर लेखक का दृष्टिकोण
  • क्रिया के सकर्मक और अकर्मक भेदों की पहचान
  • पाठ के मुख्य संदेश को समझना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?
Solution:

लेखक के अचानक ट्रेन के डिब्बे में चढ़ जाने से नवाब साहब की आँखों में एकांत चिंतन में खलल पड़ने का असंतोष स्पष्ट दिखाई दिया। इसके अतिरिक्त, नवाब साहब ने लेखक के साथ बातचीत शुरू करने में कोई उत्साह नहीं दिखाया। उन्होंने केवल सिर हिलाकर या संक्षिप्त प्रतिक्रिया देकर लेखक को अपनी ओर से बातचीत जारी रखने के लिए प्रेरित नहीं किया। इन हाव-भावों से लेखक को यह आभास हो गया कि नवाब साहब उनसे बातचीत करने में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखते हैं और वे एकांत पसंद करते हैं।

प्रश्न 2

नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंतत: सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है?
Solution:

नवाब साहब ने खीरे को बड़ी सावधानी से काटने, नमक-मिर्च छिड़कने और फिर उसे केवल सूंघकर खिड़की से बाहर फेंक देने का कार्य कई कारणों से किया होगा। संभवतः वे अपनी नवाबी शान और दिखावे के कारण ऐसा कर रहे थे। वे यह जताना चाहते थे कि वे खीरे जैसी साधारण चीज़ नहीं खाते, बल्कि केवल उसका ऊपरी दिखावा करते हैं। उनका यह कार्य उनके दंभ, मिथ्या-आडंबर, प्रदर्शन-प्रियता और व्यवहारिक खोखलेपन को दर्शाता है। वे अपनी झूठी शान को बनाए रखने के लिए ऐसा कर रहे थे, भले ही उन्हें स्वयं खीरे की आवश्यकता या इच्छा न हो।

प्रश्न 3

बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?
Solution:

लेखक यशपाल का यह कथन कि 'बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है,' नई कहानी के दौर के उन लेखकों पर एक व्यंग्य है जो कहानी के पारंपरिक तत्वों को छोड़कर केवल विचार या भाव पर आधारित रचनाएँ करने का प्रयास कर रहे थे। मैं इस विचार से पूर्णतः सहमत हूँ कि किसी भी कहानी की रचना के लिए विचार, घटना और पात्र अनिवार्य तत्व हैं। विचार कहानी की पृष्ठभूमि प्रदान करता है, घटनाएँ कथा को आगे बढ़ाती हैं, और पात्रों के माध्यम से संवाद और क्रियाएँ होती हैं। इन आवश्यक तत्वों के बिना कोई भी रचना एक पूर्ण कहानी का रूप नहीं ले सकती।

प्रश्न 4

आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?
Solution:

इस निबंध को 'लखनवी अंदाज़' के अतिरिक्त 'झूठी शान', 'नवाबी दिखावा', 'खीरे का व्यंग्य', या 'सामाजिक आडंबर' जैसे नाम भी दिए जा सकते हैं। 'झूठी शान' नाम इसलिए उपयुक्त होगा क्योंकि नवाब साहब अपनी झूठी शान को बनाए रखने के लिए अपनी वास्तविक इच्छाओं का दमन करते हैं। यह निबंध समाज में व्याप्त ऐसे ही दिखावे और आडंबर पर कटाक्ष करता है।

प्रश्न 5

नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
Solution:

सेकंड क्लास के एकांत डिब्बे में बैठे नवाब साहब ने खीरा खाने की इच्छा से दो ताज़े खीरे निकाले, जिन्हें उन्होंने एक तौलिए पर रखा हुआ था। सबसे पहले, उन्होंने खीरे को खिड़की से बाहर ले जाकर लोटे के पानी से अच्छी तरह धोया और फिर तौलिए से पोंछकर सुखा लिया। इसके बाद, उन्होंने अपनी जेब से एक चाकू निकाला और बड़े सलीके से खीरे को छीलकर उसकी पतली-पतली फाँकें बनाईं। इन फाँकों को उन्होंने करीने से तौलिए पर सजाया। फिर, उन्होंने जीरा मिला नमक और मिर्च छिड़का। इसके बाद, उन्होंने एक-एक करके उन फाँकों को उठाया, उन्हें सूंघा और फिर खिड़की से बाहर फेंक दिया।

प्रश्न 6

निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए –
  • (क) एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।
  • (ख) नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
  • (ग) ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
  • (घ) अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।
  • (ङ) दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला।
  • (च) नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक-मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँकों की ओर देखा।
  • (छ) नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।
  • (ज) जेब से चाकू निकाला।
Solution:
  • (क) बैठे थे - अकर्मक क्रिया (क्योंकि 'बैठने' का प्रभाव कर्ता 'सज्जन' पर ही पड़ रहा है, कर्म नहीं है)।
  • (ख) दिखाया – सकर्मक क्रिया (क्योंकि 'उत्साह' कर्म है, क्या दिखाया? - उत्साह)।
  • (ग) आदत है – सकर्मक क्रिया (यहाँ 'आदत है' एक क्रिया के रूप में प्रयुक्त है, जिसका कर्म 'कल्पना करते रहना' है)।
  • (घ) खरीदे होंगे – सकर्मक क्रिया (क्योंकि 'खीरे' कर्म है, क्या खरीदे होंगे? - खीरे)।
  • (ङ) निकाला – सकर्मक क्रिया (क्योंकि 'झाग' कर्म है, क्या निकाला? - झाग)।
  • (च) देखा – सकर्मक क्रिया (क्योंकि 'खीरे की फाँकों की ओर' कर्म है, किसे देखा? - फाँकों की ओर)।
  • (छ) लेट गए - अकर्मक क्रिया (क्योंकि 'लेटने' का प्रभाव कर्ता 'नवाब साहब' पर ही पड़ रहा है, कर्म नहीं है)।
  • (ज) निकाला – सकर्मक क्रिया (क्योंकि 'चाकू' कर्म है, क्या निकाला? - चाकू)।

Common mistakes

  • नवाब साहब के व्यवहार के पीछे के व्यंग्य को न समझ पाना।
  • क्रिया के सकर्मक और अकर्मक भेदों में भ्रमित होना।
  • पाठ के मुख्य संदेश को सतही तौर पर समझना।
  • पात्रों के चरित्र-चित्रण का गहरा विश्लेषण न कर पाना।

Revision tips

  • नवाब साहब के खीरे फेंकने के कार्य के पीछे छिपे व्यंग्य पर विशेष ध्यान दें।
  • क्रिया के भेदों को समझने के लिए दिए गए उदाहरणों का अभ्यास करें।
  • पाठ के मुख्य संदेश और लेखक के उद्देश्य को समझने का प्रयास करें।
  • निबंध के शीर्षक और उसके औचित्य पर विचार करें।

Practice MCQs

Q1. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से लगा कि वे बातचीत में उत्सुक नहीं हैं?

Q2. नवाब साहब ने खीरे को सूँघकर खिड़की से बाहर क्यों फेंक दिया?

Q3. नवाब साहब का खीरे को खाने की तैयारी करने का तरीका क्या दर्शाता है?

Q4. लेखक यशपाल ने 'लखनवी अंदाज़' निबंध किसके ऊपर व्यंग्य करने के लिए लिखा है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन सा वाक्य अकर्मक क्रिया का उदाहरण है?

Frequently asked questions

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के अध्याय 12 का क्या नाम है?

कक्षा 10 हिंदी क्षितिज के अध्याय 12 का नाम 'लखनवी अंदाज़' है, जिसके लेखक यशपाल हैं।

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान कक्षा 10 के हिंदी विषय (क्षितिज भाग 2) के लिए हैं।

'लखनवी अंदाज़' निबंध किस बारे में है?

यह निबंध नवाबों के झूठे अभिमान, दिखावटी व्यवहार और सामाजिक आडंबरों पर व्यंग्य करता है। इसमें लेखक ने खीरे को खाने की अनोखी विधि के माध्यम से ऐसे लोगों के खोखलेपन को दर्शाया है।

नवाब साहब ने खीरे को सूँघकर क्यों फेंक दिया?

नवाब साहब ने खीरे को सूँघकर इसलिए फेंक दिया क्योंकि वे अपनी नवाबी शान और दिखावे के चक्कर में थे। वे यह जताना चाहते थे कि वे खीरे जैसी साधारण चीज़ नहीं खाते, बल्कि केवल दिखावा करते हैं।

क्या इन समाधानों में भाषा अध्ययन के प्रश्न भी शामिल हैं?

हाँ, इन समाधानों में भाषा अध्ययन के अंतर्गत क्रियापदों को पहचानने और उनके भेदों (सकर्मक/अकर्मक) को बताने वाले प्रश्न भी शामिल हैं।

ये समाधान छात्रों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ की गहरी समझ, पात्रों के विश्लेषण और भाषा के प्रयोग को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्र परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने में सक्षम होंगे।

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