CBSE Class 10 Hindi Kritika Chapter 4: एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! NCERT Solutions
This section provides detailed NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika, Chapter 4, titled 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!'. The chapter explores the significant contributions of marginalized sections of society to India's freedom struggle, highlighting characters like Tunnu and Dulari. It delves into the complexities of Dulari's character, her seemingly harsh exterior masking a tender heart, and her emotional response to Tunnu's death. The solutions also discuss the cultural significance of folk events like Kajli Dangal and their role in social gatherings. Students will find explanations of character traits, thematic analyses, and insights into the socio-cultural context of the story, aiding in their exam preparation and deeper understanding of the chapter's nuances.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Hindi Kritika |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 4 |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 4, 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!', focuses on the role of the underprivileged in India's freedom movement. It analyzes the character of Dulari, her outward toughness, and inner compassion, especially concerning Tunnu. The solutions also touch upon the cultural importance of folk performances like Kajli Dangal and offer examples of other traditional Indian folk events. This chapter's solutions help students understand character depth and societal contributions.
Learning outcomes
- Understand the contribution of marginalized sections to India's freedom struggle.
- Analyze the character of Dulari, her duality, and emotional depth.
- Explain the significance of folk art forms like Kajli Dangal.
- Identify and discuss the character traits of Dulari.
- Relate the story's themes to contemporary societal issues.
Topics covered
Paper topics
- Contribution of marginalized sections to freedom struggle
- Character analysis of Dulari
- Dulari's relationship with Tunnu
- Emotional depth and duality of character
- Significance of folk art and events (Kajli Dangal)
- Social and cultural context
- Themes of sacrifice and love
- Individuality and self-respect
Important topics
- Character analysis of Dulari
- Contribution of marginalized sections
- Dulari and Tunnu's relationship
- Significance of Kajli Dangal
- Themes of sacrifice and love
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
भारत की स्वतंत्रता संग्राम में समाज के हर वर्ग, धर्म और समुदाय के लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया था। इस कहानी के माध्यम से लेखक ने समाज में अक्सर उपेक्षित या हीन समझे जाने वाले वर्ग के सदस्यों, जैसे टुन्नू और दुलारी, के अमूल्य योगदान को उजागर किया है। टुन्नू ने आज़ादी के लिए निकाले गए जुलूसों में भाग लिया और अंततः अपने प्राणों की आहुति दे दी। उसके इस बलिदान ने यह सिद्ध किया कि ये लोग केवल मनोरंजन के लिए नहीं बने हैं, बल्कि उनके दिलों में भी देश को आज़ाद कराने का प्रबल जोश और जज़्बा था। इसी प्रकार, दुलारी ने भी रेशमी साड़ियों के बंडल को आंदोलनकारियों को जलाने के लिए स्वेच्छा से दे दिया, जो एक साहसिक कदम था। जलसे में गायिका के रूप में उसका प्रदर्शन और नृत्य भी उसके योगदान का प्रतीक है। इस प्रकार, लेखक ने समाज के इन वंचित और उपेक्षित लोगों के स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाया है।
प्रश्न 2
दुलारी को अक्सर उसके कठोर स्वभाव के कारण जाना जाता था, लेकिन उसका यह कठोर आचरण एक अकेली स्त्री के रूप में अपनी रक्षा करने का तरीका था। वास्तव में, वह अंदर से बहुत नरम दिल की थी। टुन्नू, जो उससे प्रेम करता था, उसके लिए दुलारी के हृदय में एक विशेष स्थान था, भले ही वह उसे उम्र में छोटा होने के कारण अक्सर दुत्कारती रहती थी। दुलारी यह जानती थी कि टुन्नू का प्रेम उसके शरीर के लिए नहीं, बल्कि उसकी गायन कला के प्रति था। जब फेंकू ने टुन्नू की मृत्यु का समाचार सुनाया, तो दुलारी का हृदय अत्यंत व्यथित हो गया और उसकी आँखों से आँसूओं की धारा बह निकली। जिस हृदय को कोई पिघला नहीं पाता था, वह आज टुन्नू के लिए चीत्कार कर रहा था। टुन्नू की मृत्यु ने दुलारी के मन में छिपे उसके प्रति प्रेम को सबके सामने प्रकट कर दिया। उसने टुन्नू द्वारा दी गई खादी की धोती पहनकर अपने प्रेम और सम्मान को दर्शाया।
प्रश्न 3
उस समय कजली दंगल जैसी गतिविधियों का आयोजन मुख्य रूप से मनोरंजन के साधन के रूप में होता था। हालाँकि, इनमें लोगों की प्रतिष्ठा का प्रश्न भी जुड़ा होता था। इन कजली गायकों को समारोहों में आमंत्रित किया जाता था और उनकी प्रतिष्ठा को इन आयोजनों से जोड़ दिया जाता था। गायकों की हार-जीत पर ही ऐसे समारोहों की रौनक टिकी रहती थी। भारत में विभिन्न स्थानों पर अनेक प्रकार के पारंपरिक लोक आयोजन होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- उत्तर भारत में पहलवानी या कुश्ती के दंगल।
- राजस्थान में लोक संगीत और पशु मेलों का आयोजन।
- पंजाब में लोकनृत्य और लोक संगीत के कार्यक्रम।
- दक्षिण भारत में बैलों की दौड़ (दंगल) और हाथी-युद्ध जैसे आयोजन।
प्रश्न 4
यह कथन बिल्कुल सत्य है कि दुलारी सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के स्थापित दायरे से बाहर होने के बावजूद एक अत्यंत विशिष्ट चरित्र है। समाज के प्रतिष्ठित वर्ग द्वारा अक्सर ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तियों और उनकी कलाओं को उचित सम्मान नहीं मिलता, परंतु दुलारी ने अपने व्यक्तित्व और प्रतिभा से अपनी एक अलग पहचान बनाई है, जो उसे असाधारण रूप से विशिष्ट बनाती है। उसकी चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- प्रभावशाली गायिका: दुलारी एक अत्यंत कुशल और प्रभावशाली गायिका थी। उसकी आवाज़ में मधुरता और लय का अद्भुत संगम था। पद्य में सवाल-जवाब करने की उसकी कुशलता अद्वितीय थी, जिसके सामने बड़े-बड़े गायक भी फीके पड़ जाते थे।
- देश के प्रति समर्पित: यद्यपि दुलारी सीधे तौर पर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल नहीं हुई, वह अपने देश के प्रति गहरी निष्ठा रखती थी। उसने बिना किसी हिचकिचाहट के फेंकू द्वारा दी गई रेशमी साड़ियों के बंडल को आंदोलनकारियों को जलाने के लिए सौंप दिया।
- समर्पित प्रेमिका: दुलारी टुन्नू से मन ही मन प्रेम करती थी, लेकिन उसने जीते जी अपने प्रेम को कभी व्यक्त नहीं किया। टुन्नू की मृत्यु के बाद ही उसके हृदय में दबे प्रेम की धारा आँसुओं के रूप में प्रवाहित हुई।
- निडर स्त्री: दुलारी एक निडर और साहसी महिला थी। वह किसी से डरती नहीं थी। अकेले रहने के कारण उसने अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं को निडर बनाया था। इसी निडरता के बल पर उसने फेंकू की साड़ी जुलूस में फेंक दी और टुन्नू की मृत्यु के बाद भी अंग्रेज़ विरोधी समारोह में गायन प्रस्तुत किया।
- स्वाभिमानी स्त्री: दुलारी अत्यंत स्वाभिमानी थी और अपने आत्म-सम्मान से कभी समझौता नहीं करती थी। उसने अकेले रहकर भी सम्मान के साथ जीना सीखा था। फेंकू द्वारा दी गई साड़ी को फेंक देना उसके इसी स्वाभिमान का प्रतीक था।
प्रश्न 5
दुलारी और टुन्नू का पहली बार परिचय भादों के महीने में, तीज के अवसर पर, खोजवाँ बाज़ार में हुआ था। दुलारी को वहाँ गाने के लिए बुलाया गया था। वह दुक्कड़ पर गाने वाली गायिका के रूप में प्रसिद्ध थी और पद्य में सवाल-जवाब करने की कला में उसकी महारत ऐसी थी कि बड़े-बड़े गायक भी उसके सामने टिक नहीं पाते थे। उसी कजली दंगल में उसकी मुलाकात टुन्नू से हुई, जिसने पद्यात्मक शैली में प्रश्न-उत्तर करने में अपनी कुशलता का प्रदर्शन किया। टुन्नू ने दुलारी को चुनौती देते हुए ललकारा, और दुलारी उसकी प्रतिभा से मुग्ध होकर मुस्कुराती रही। इस दंगल में टुन्नू ने अपनी गायन कला से दुलारी को भी प्रभावित कर दिया था।
प्रश्न 6
दुलारी का टुन्नू से यह कहना कि "तैं सरबउला बोल ज़िन्नगी में कब देखले लोट?...!" (अर्थात, तुमने जीवन में कभी कोई बड़ी या महत्वपूर्ण चीज़ नहीं देखी/अनुभव की है) उस समय शायद उचित लग सकता है क्योंकि दुलारी टुन्नू को एक अनुभवहीन और कम उम्र का लड़का मानती थी। वह सोचती थी कि टुन्नू ने जीवन की कठिनाइयों और वास्तविकताओं का सामना नहीं किया है। हालाँकि, यह कथन दुलारी की अपनी सीमित सोच को दर्शाता है, जो टुन्नू की भावनाओं और उसके देश प्रेम को कम आंकती है।
आज के युवा वर्ग के लिए संदेश:
इस आक्षेप में आज के युवा वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा है। यह संदेश यह है कि हमें किसी भी व्यक्ति, विशेषकर युवाओं को उनकी उम्र या अनुभव की कमी के आधार पर कम नहीं आंकना चाहिए। युवा पीढ़ी में भी देश प्रेम, साहस और समर्पण की भावना कूट-कूट कर भरी हो सकती है। वे भी बड़े-बड़े कार्य करने में सक्षम होते हैं, भले ही उन्होंने जीवन की कठोरता का प्रत्यक्ष अनुभव न किया हो।
उदाहरण:
आज के युवा सोशल मीडिया के माध्यम से या विभिन्न सामाजिक अभियानों में सक्रिय होकर देश और समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। वे पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, या अन्य सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाते हैं और समाधान खोजने में मदद करते हैं। उदाहरण के लिए, कई युवा स्टार्टअप्स नवाचारों के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, या वे सामाजिक कार्यों में स्वेच्छा से भाग लेकर समाज की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। यह दर्शाता है कि युवा पीढ़ी भी जीवन की 'लोट' (महत्वपूर्ण अनुभव) को अपने तरीके से देखती और अनुभव करती है, और वे भी देश के लिए बड़े कार्य कर सकते हैं। दुलारी का यह कथन हमें सिखाता है कि हमें युवाओं की क्षमता पर विश्वास करना चाहिए और उन्हें अवसर देना चाहिए।
Common mistakes
- Misinterpreting Dulari's harsh exterior as a lack of emotion.
- Underestimating the role of seemingly ordinary people in historical movements.
- Confusing the purpose of folk events solely as entertainment.
- Failing to connect character actions to their underlying motivations.
Revision tips
- Focus on understanding Dulari's character arc and her relationship with Tunnu.
- Identify specific instances where marginalized characters contributed to the freedom struggle.
- Note down the examples of traditional folk events mentioned in the solutions.
- Re-read the chapter with an emphasis on the themes of social contribution and hidden emotions.
Practice MCQs
Q1. कहानी में समाज के उपेक्षित वर्ग के योगदान को दर्शाने के लिए किन पात्रों का उल्लेख किया गया है?
Explanation: लेखक ने टुन्नू और दुलारी जैसे पात्रों के माध्यम से समाज के उपेक्षित वर्ग के योगदान को स्वतंत्रता आंदोलन में उजागर किया है।
Q2. दुलारी को कठोर ह्रदयी क्यों समझा जाता था, जबकि वह नरम दिल की थी?
Explanation: दुलारी एक अकेली स्त्री थी और अपनी सुरक्षा के लिए कठोर व्यवहार करती थी, लेकिन अंदर से वह बहुत नरम दिल की थी।
Q3. कजली दंगल जैसी गतिविधियों का आयोजन उस समय मुख्य रूप से किस लिए होता था?
Explanation: उस समय कजली दंगल जैसी गतिविधियाँ मुख्य रूप से मनोरंजन का साधन हुआ करती थीं, हालांकि प्रतिष्ठा का प्रश्न भी जुड़ा होता था।
Q4. दुलारी ने टुन्नू की मृत्यु पर अपनी प्रतिक्रिया कैसे व्यक्त की?
Explanation: टुन्नू की मृत्यु का समाचार सुनकर दुलारी का हृदय द्रवित हो गया, वह रो पड़ी और टुन्नू द्वारा दी गई खादी की धोती पहनकर अपना प्रेम व्यक्त किया।
Q5. दुलारी की चारित्रिक विशेषताओं में कौन सी शामिल नहीं है?
Explanation: दुलारी निडर स्त्री थी, डरपोक नहीं। वह अपनी रक्षा और सम्मान के लिए स्वयं को निडर बनाती थी।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह NCERT समाधान कक्षा 10 के हिंदी विषय की 'कृतिका भाग 2' पुस्तक के अध्याय 4, 'एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!' के लिए हैं।
अध्याय 4 में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई है?
अध्याय 4 भारत की आज़ादी की लड़ाई में समाज के उपेक्षित वर्ग के योगदान और दुलारी नामक पात्र के चरित्र की जटिलताओं पर केंद्रित है।
दुलारी के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
दुलारी एक प्रभावशाली गायिका, देश के प्रति समर्पित, समर्पित प्रेमिका, निडर और स्वाभिमानी स्त्री है, जिसका कठोर बाहरी आचरण उसके नरम दिल को छुपाता है।
कजली दंगल जैसी लोक गतिविधियों का क्या महत्व था?
कजली दंगल जैसी गतिविधियाँ उस समय मनोरंजन का साधन थीं और लोगों की प्रतिष्ठा से जुड़ी होती थीं, जहाँ गायकों की हार-जीत समारोह का केंद्र बनती थी।
ये समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को पात्रों, विषयों और कहानी के संदर्भ को गहराई से समझने में मदद मिलती है, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने के लिए आवश्यक है।
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