कक्षा 10 अभ्यासवान् भव संस्कृत: अध्याय 12 NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 10 के छात्रों के लिए अभ्यासवान् भव संस्कृत पुस्तक के अध्याय 12, 'अशुद्धि संशोधन' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इस अध्याय में वाक्यों में व्याकरणिक अशुद्धियों को पहचानना और उन्हें ठीक करना सिखाया जाता है। समाधानों में क्रियाओं के सही रूप, सर्वनामों का उचित प्रयोग, लिंग और वचन की संगति, और अन्य महत्वपूर्ण व्याकरणिक नियमों पर जोर दिया गया है। प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत हल छात्रों को यह समझने में मदद करता है कि अशुद्धियों को कैसे सुधारा जाए और सही वाक्य कैसे बनाया जाए। यह संसाधन छात्रों को संस्कृत व्याकरण की अपनी समझ को मजबूत करने और परीक्षाओं के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सहायता करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Abhyasvan Bhavah |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 12 |
Chapter summary
अध्याय 12, 'अशुद्धि संशोधन', छात्रों को संस्कृत वाक्यों में सामान्य व्याकरणिक त्रुटियों को पहचानने और ठीक करने का अभ्यास कराता है। इसमें क्रियाओं के काल और पुरुष के अनुसार सही रूप का प्रयोग, सर्वनामों का उचित संयोजन, तथा संज्ञाओं के लिंग और वचन के अनुसार विशेषणों का सही प्रयोग शामिल है। समाधान प्रत्येक वाक्य में त्रुटि के कारण को स्पष्ट करते हैं और सही रूप प्रस्तुत करते हैं, जिससे छात्रों को संस्कृत व्याकरण के नियमों की गहरी समझ विकसित करने में मदद मिलती है।
Learning outcomes
- वाक्यों में क्रिया संबंधी अशुद्धियों को पहचानना और सुधारना।
- सर्वनामों के सही प्रयोग को समझना।
- लिंग और वचन के अनुसार संज्ञाओं और विशेषणों का सही मेल करना।
- वाक्य में काल (Tense) की शुद्धता सुनिश्चित करना।
- संस्कृत व्याकरण के नियमों का प्रभावी ढंग से अनुप्रयोग करना।
Topics covered
Paper topics
- अशुद्धि संशोधन
- सर्वनाम प्रयोग
- क्रिया का सही रूप
- लिंग-वचन संगति
- आज्ञार्थक क्रिया
- कर्मवाच्य
- भविष्य काल
- संख्यावाची शब्द
Important topics
- सर्वनामों का उचित प्रयोग
- क्रियाओं के पुरुष और वचन के अनुसार सही रूप
- लिंग और वचन की शुद्धता
- आज्ञार्थक वाक्यों का संशोधन
- कर्मवाच्य वाक्यों का संशोधन
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
यह अभ्यास छात्रों को संस्कृत वाक्यों में व्याकरणिक अशुद्धियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का कौशल सिखाता है। प्रत्येक वाक्य में एक या अधिक त्रुटियाँ हो सकती हैं, जिन्हें संबंधित व्याकरण के नियमों के अनुसार ठीक करना होता है। नीचे प्रत्येक उप-प्रश्न का विस्तृत हल दिया गया है:
प्रश्न 1 (i)
इस वाक्य में सर्वनाम 'वयं' (हम सब - उत्तम पुरुष, बहुवचन) और क्रिया 'पश्यन्ति' (वे देखते हैं - प्रथम पुरुष, बहुवचन) के बीच पुरुष की संगति नहीं है। 'वयं' के साथ क्रिया का उत्तम पुरुष, बहुवचन रूप 'पश्यामः' होना चाहिए। यदि कर्ता 'ते' (वे - प्रथम पुरुष, बहुवचन) होता, तो क्रिया 'पश्यन्ति' सही होती।
शुद्ध वाक्य: वयं चित्रं पश्यामः।
प्रश्न 1 (ii)
यहाँ 'भवान्' (आप - मध्यम पुरुष, एकवचन) के साथ क्रिया 'खाद' (खाओ - मध्यम पुरुष, एकवचन, आज्ञार्थक) का प्रयोग किया गया है। 'भवान्' के साथ आज्ञा देने के लिए क्रिया का उचित रूप 'खादतु' (आप खाएं) होगा, जो कि मध्यम पुरुष, एकवचन, आज्ञार्थक का सही रूप है।
शुद्ध वाक्य: भवान् भोजनं खादतु।
प्रश्न 1 (iii)
इस वाक्य में सर्वनाम 'त्वं' (तुम - मध्यम पुरुष, एकवचन) के साथ क्रिया 'स्मरतु' (वह याद करे - प्रथम पुरुष, एकवचन, आज्ञार्थक) का प्रयोग हुआ है। 'त्वं' के साथ क्रिया का मध्यम पुरुष, एकवचन, आज्ञार्थक रूप 'स्मर' (तुम याद करो) होना चाहिए।
शुद्ध वाक्य: त्वं पाठं स्मर।
प्रश्न 1 (iv)
यहाँ विशेषण 'पीतः' (पीला) का प्रयोग संज्ञा 'वस्त्रं' (वस्त्र) के लिए हुआ है। 'वस्त्रं' नपुंसकलिंग, एकवचन है। इसलिए विशेषण को भी नपुंसकलिंग, एकवचन होना चाहिए। 'पीतः' पुल्लिंग, एकवचन है। इसका शुद्ध नपुंसकलिंग, एकवचन रूप 'पीतम्' होगा।
शुद्ध वाक्य: सः पीतं वस्त्रं धारयति।
प्रश्न 1 (v)
इस वाक्य में संख्या 'तीन' के लिए 'त्रीणि' का प्रयोग हुआ है, जो नपुंसकलिंग, एकवचन है। संज्ञा 'वृक्षाः' (पेड़) पुल्लिंग, बहुवचन है। इसलिए संख्या का रूप भी पुल्लिंग, बहुवचन होना चाहिए। 'तीन' के लिए पुल्लिंग, बहुवचन रूप 'त्रयः' है।
शुद्ध वाक्य: त्रयः वृक्षाः तत्र शोभन्ते।
प्रश्न 1 (vi)
यहाँ कर्ता 'ताः महिलाः' (वे महिलाएँ - स्त्रीलिंग, बहुवचन) है। क्रिया 'गमिष्यति' (वह जाएगा/जाएगी - प्रथम पुरुष, एकवचन) का प्रयोग हुआ है। कर्ता के वचन के अनुसार क्रिया का रूप प्रथम पुरुष, बहुवचन 'गमिष्यन्ति' होना चाहिए।
शुद्ध वाक्य: ताः महिलाः न गमिष्यन्ति।
प्रश्न 1 (vii)
यह वाक्य कर्मवाच्य का प्रतीत होता है, जहाँ 'त्वम्' (तुम) कर्म के स्थान पर है। कर्मवाच्य में कर्ता के स्थान पर करण कारक का प्रयोग होता है। 'त्वम्' का करण कारक 'त्वया' होता है। क्रिया 'क्रियते' (किया जाता है) कर्मवाच्य के लिए सही है, लेकिन कर्ता के अनुसार सर्वनाम में परिवर्तन आवश्यक है।
शुद्ध वाक्य: त्वया किं क्रियते?
प्रश्न 1 (viii)
यहाँ 'श्वः' (आने वाले कल) शब्द भविष्य काल का सूचक है। क्रिया 'आगच्छति' (आता है - वर्तमान काल) का प्रयोग हुआ है। भविष्य काल के लिए क्रिया का उचित रूप 'आगमिष्यति' (आएगा) होगा।
शुद्ध वाक्य: पिता श्वः आगमिष्यति।
प्रश्न 1 (ix)
इस वाक्य में 'युष्माभिः' (तुम सब द्वारा - करण कारक) का प्रयोग हुआ है, जो कर्मवाच्य का संकेत देता है। कर्मवाच्य में क्रिया कर्ता के अनुसार नहीं, बल्कि कर्म के अनुसार होती है। यदि यह कर्तृवाच्य का वाक्य है, तो कर्ता 'यूयं' (तुम सब - मध्यम पुरुष, बहुवचन) होना चाहिए और क्रिया 'पठथ' (तुम सब पढ़ते हो) होगी। यदि यह कर्मवाच्य है, तो 'युष्माभिः' सही है, लेकिन क्रिया 'पठ्यते' (पढ़ा जाता है) या 'पठ्यन्ते' (पढ़े जाते हैं) होनी चाहिए। दिए गए उत्तर 'ते किं पठिन्ति/यूयं किं पठथ?' के अनुसार, यह कर्तृवाच्य का वाक्य माना गया है, जिसमें 'युष्माभिः' के स्थान पर 'यूयं' होना चाहिए और क्रिया 'पठथ' होनी चाहिए। 'ते किं पठिन्ति' (वे क्या पढ़ते हैं) भी एक संभावित शुद्ध वाक्य है यदि कर्ता 'ते' माना जाए।
शुद्ध वाक्य (कर्तृवाच्य): यूयं किं पठथ? या शुद्ध वाक्य (कर्तृवाच्य): ते किं पठन्ति?
प्रश्न 1 (x)
यहाँ सर्वनाम 'सः' (वह - प्रथम पुरुष, एकवचन) का प्रयोग हुआ है, जबकि क्रिया 'सन्ति' (हैं - प्रथम पुरुष, बहुवचन) का प्रयोग हुआ है। कर्ता और क्रिया के वचन में संगति नहीं है। यदि कर्ता 'सः' है, तो क्रिया 'अस्ति' (है) होनी चाहिए। यदि क्रिया 'सन्ति' सही है, तो कर्ता 'ते' (वे - प्रथम पुरुष, बहुवचन) होना चाहिए। दिए गए उत्तर के अनुसार, कर्ता 'ते' माना गया है।
शुद्ध वाक्य: ते तत्र न सन्ति।
प्रश्न 1 (xi)
यह वाक्य कर्मवाच्य का प्रतीत होता है, जिसमें 'अमितेन' (अमित द्वारा - करण कारक) कर्ता के रूप में है। कर्मवाच्य में क्रिया कर्म के अनुसार होती है। यहाँ कर्म 'एतत् कार्यं' (यह कार्य - नपुंसकलिंग, एकवचन) है। कर्मवाच्य में क्रिया का रूप 'क्रियते' (किया जाता है) होगा। 'करोति' (करता है) कर्तृवाच्य की क्रिया है।
शुद्ध वाक्य: अमितेन एतत् कार्यं क्रियते।
प्रश्न 1 (xii)
यहाँ 'यूयं' (तुम सब - कर्ता) के साथ 'गन्तव्यम्' (जाना चाहिए - कृदंत) का प्रयोग हुआ है। जब 'गन्तव्यम्' जैसे कृदंत का प्रयोग होता है, तो कर्ता के स्थान पर करण कारक का प्रयोग होता है। 'यूयं' का करण कारक 'युष्माभिः' होता है।
शुद्ध वाक्य: युष्माभिः तत्र न गन्तव्यम्।
प्रश्न 1 (xiii)
यहाँ 'मया' (मेरे द्वारा - करण कारक) के साथ 'खादितव्यम्' (खाना चाहिए - कृदंत) का प्रयोग हुआ है। कृदंत 'खादितव्यम्' नपुंसकलिंग, एकवचन है। कर्म 'एतानि फलानि' (ये फल - नपुंसकलिंग, बहुवचन) है। कृदंत का रूप कर्म के अनुसार होना चाहिए। इसलिए 'खादितव्यम्' के स्थान पर 'खादितव्यानि' (नपुंसकलिंग, बहुवचन) होगा।
शुद्ध वाक्य: मया एतानि फलानि खादितव्यानि।
प्रश्न 1 (xiv)
यहाँ 'कुन्याः' शब्द में अशुद्धि है। संभवतः यह 'कन्याः' (लड़कियों का - षष्ठी बहुवचन) या 'कन्या' (लड़की - प्रथमा एकवचन) होना चाहिए। यदि कर्ता एकवचन 'कन्या' है, तो क्रिया 'पठति' (पढ़ती है - प्रथम पुरुष, एकवचन) सही है। यदि कर्ता बहुवचन 'कन्याः' होता, तो क्रिया 'पठन्ति' होती। दिए गए उत्तर के अनुसार, 'कुन्याः' को 'कन्या' माना गया है।
शुद्ध वाक्य: कन्या पाठं पठति।
प्रश्न 1 (xv)
यहाँ कर्ता 'अम्बा' (माँ - स्त्रीलिंग, एकवचन) है। क्रिया 'पचन्ति' (वे पकाते हैं - प्रथम पुरुष, बहुवचन) का प्रयोग हुआ है। कर्ता के एकवचन के अनुसार क्रिया का रूप प्रथम पुरुष, एकवचन 'पचति' (पकाती है) होना चाहिए।
शुद्ध वाक्य: अम्बा भोजनं पचति।
प्रश्न 1 (xvi)
यहाँ 'तेन' (उसके द्वारा - करण कारक) का प्रयोग हुआ है, जो कर्मवाच्य या कृदंत के प्रयोग का संकेत देता है। 'खादनीयानि' (खाने योग्य - नपुंसकलिंग, बहुवचन) एक कृदंत है। कर्म 'भोजनं' (भोजन - नपुंसकलिंग, एकवचन) है। कृदंत का रूप कर्म के अनुसार होना चाहिए। इसलिए 'खादनीयानि' के स्थान पर 'खादनीयम्' (नपुंसकलिंग, एकवचन) होगा।
शुद्ध वाक्य: तेन भोजनं खादनीयम्।
Common mistakes
- क्रिया के पुरुष (Person) और वचन (Number) का गलत प्रयोग।
- सर्वनामों का संज्ञा के अनुसार सही रूप में न होना।
- लिंग (Gender) और वचन (Number) की असंगति।
- काल (Tense) संबंधी त्रुटियाँ।
Revision tips
- प्रत्येक वाक्य में अशुद्धि के प्रकार को पहचानें (जैसे क्रिया, सर्वनाम, लिंग, वचन)।
- सुधारे गए वाक्य की तुलना मूल वाक्य से करें ताकि अंतर स्पष्ट हो सके।
- संबंधित व्याकरणिक नियमों को दोहराएं, विशेषकर क्रिया रूपों और सर्वनामों के बारे में।
- अभ्यास के लिए इसी प्रकार के और वाक्य स्वयं बनाने का प्रयास करें।
Practice MCQs
Q1. वाक्य 'वयं चित्रं पश्यन्ति।' में क्या अशुद्धि है?
Explanation: यहाँ 'वयं' (हम सब) के साथ क्रिया 'पश्यन्ति' (वे देखते हैं) का प्रयोग हुआ है, जो कि प्रथम पुरुष बहुवचन के लिए है। 'वयं' उत्तम पुरुष बहुवचन है, इसलिए क्रिया 'पश्यामः' होनी चाहिए। यदि कर्ता 'ते' (वे) होता तो 'पश्यन्ति' सही होता।
Q2. वाक्य 'भवान् भोजनं खाद।' में क्या सुधार आवश्यक है?
Explanation: यहाँ 'भवान्' (आप) के साथ क्रिया 'खाद' (खाओ) का प्रयोग हुआ है, जो मध्यम पुरुष, एकवचन, आज्ञार्थक का रूप है। 'भवान्' के साथ क्रिया का रूप 'खादतु' (आप खाएं) होना चाहिए, जो कि आज्ञार्थक का ही उचित रूप है।
Q3. वाक्य 'त्वं पाठं स्मरतु।' में क्या सुधार अपेक्षित है?
Explanation: यहाँ 'त्वं' (तुम) के साथ क्रिया 'स्मरतु' (वह याद करे) का प्रयोग हुआ है। 'त्वं' मध्यम पुरुष एकवचन है, इसलिए क्रिया का रूप 'स्मर' (तुम याद करो) होना चाहिए।
Q4. वाक्य 'सः पीतः वस्त्रं धारयति।' में 'पीतः' का शुद्ध रूप क्या होगा?
Explanation: यहाँ 'वस्त्रं' (वस्त्र) नपुंसकलिंग एकवचन है। विशेषण 'पीतः' (पीला) को भी नपुंसकलिंग एकवचन 'पीतम्' होना चाहिए ताकि लिंग और वचन की संगति बनी रहे।
Q5. वाक्य 'त्रीणि वृक्षाः तत्र शोभन्ते।' में 'त्रीणि' का शुद्ध रूप क्या है?
Explanation: 'वृक्षाः' (पेड़) शब्द पुल्लिंग बहुवचन है। इसलिए संख्या 'तीन' के लिए पुल्लिंग बहुवचन रूप 'त्रयः' का प्रयोग होगा, न कि नपुंसकलिंग एकवचन 'त्रीणि' का।
Q6. वाक्य 'ताः महिलाः न गमिष्यति।' में क्रिया का शुद्ध रूप क्या होगा?
Explanation: 'ताः महिलाः' (वे महिलाएँ) स्त्रीलिंग बहुवचन है। इसके साथ क्रिया भी स्त्रीलिंग बहुवचन होनी चाहिए। भविष्य काल में 'गम्' धातु का रूप 'गमिष्यन्ति' होगा।
Q7. वाक्य 'त्वम् किं क्रियते?' में क्या सुधार आवश्यक है?
Explanation: यह वाक्य कर्मवाच्य का प्रतीत होता है जहाँ 'त्वम्' (तुम) को कर्म के रूप में प्रयोग किया गया है। कर्मवाच्य में कर्ता के स्थान पर करण कारक का प्रयोग होता है, इसलिए 'त्वम्' का करण कारक 'त्वया' होगा।
Frequently asked questions
यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह समाधान कक्षा 10 के छात्रों के लिए अभ्यासवान् भव संस्कृत पुस्तक के अध्याय 12 के लिए है।
अध्याय 12 का मुख्य विषय क्या है?
अध्याय 12 का मुख्य विषय 'अशुद्धि संशोधन' है, जिसमें संस्कृत वाक्यों में व्याकरणिक त्रुटियों को पहचानना और उन्हें ठीक करना सिखाया जाता है।
इन समाधानों से छात्रों को कैसे मदद मिलेगी?
ये समाधान छात्रों को प्रत्येक प्रश्न के पीछे के व्याकरणिक तर्क को समझने में मदद करते हैं, जिससे वे अपनी गलतियों को सुधार सकें और परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
क्या समाधानों में मूल प्रश्न बदले गए हैं?
नहीं, सभी प्रश्न मूल स्रोत के अनुसार समान रखे गए हैं, केवल समाधानों को स्पष्टता और विस्तार के साथ फिर से लिखा गया है।
समाधानों में किन व्याकरणिक पहलुओं पर ध्यान दिया गया है?
समाधानों में मुख्य रूप से सर्वनामों के प्रयोग, क्रियाओं के सही रूप (पुरुष, वचन, काल), लिंग-वचन की संगति, और कर्मवाच्य जैसे व्याकरणिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
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