CBSE Class 10 Abhyasvan Bhavah Chapter 13: मिश्रिताभ्यासः NCERT Solutions

NCERT Solutions PDF Class 10 PDF

This section provides NCERT Solutions for Class 10 Abhyasvan Bhavah, Chapter 13, titled 'मिश्रिताभ्यासः' (Mixed Practice). It includes detailed answers to exercises based on a given passage about perseverance, a short essay on why suicide is not a solution, and a letter to a friend about the benefits of reading. The solutions are designed to help students understand the importance of consistent effort, the gravity of mental health issues, and the value of reading. By working through these questions, students will enhance their comprehension skills, essay writing abilities, and letter writing formats, which are crucial for their academic success and overall development. These solutions serve as an excellent tool for revision and exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
SubjectAbhyasvan Bhavah
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 13

Chapter summary

Chapter 13 of Abhyasvan Bhavah for Class 10, 'मिश्रिताभ्यासः', focuses on mixed practice exercises. It includes reading comprehension based on a motivational passage about a student inspired by an ant's perseverance, a short essay on the theme that suicide is never a solution, and a letter writing exercise detailing the benefits of reading. This chapter aims to reinforce language skills and critical thinking through practical application.

Learning outcomes

  • Understand and answer questions based on a given Hindi passage.
  • Comprehend the message of perseverance from the story of Suveer and the ant.
  • Articulate the idea that suicide is not a solution to problems.
  • Write a letter to a friend explaining the benefits of reading.
  • Identify grammatical elements like adverbs, synonyms, and adjectives in sentences.

Topics covered

Paper topics

  • Passage Comprehension
  • Perseverance and Motivation
  • Suicide Prevention
  • Benefits of Reading
  • Letter Writing Format
  • Grammar: Adverbs
  • Grammar: Synonyms
  • Grammar: Nouns
  • Grammar: Adjectives
  • Hindi Language Practice

Important topics

  • Passage Comprehension Skills
  • The message of perseverance
  • Understanding that suicide is not a solution
  • Letter writing to a friend
  • Identifying grammatical elements

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1. अधोलिखितम् अनुच्छेदं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत-

पठनम् अतीव अरुचिकरं मन्यमानः सुवीरः हतोत्साहः भूत्वा कक्षस्य एकस्मिन् कोणे विचारमग्नः अतिष्ठत्। तस्य मनसि असफलतायाः कारणात् आत्मघातस्य भावना जागृता। दुःखितः भूत्वा आत्मचिन्तनं कुर्वन् सः भित्तिम् आरोहन्तम् एकं पिपीलकं पश्यति, यः पुनः पुनः पतित्वा अपि हतोत्साहितः न भवति, अपितु सततं प्रयासेन सः अन्नतः भित्तिम् आरोहति तत्रस्थं मिष्टान्नं च प्राप्नोति। तस्य विवेको जागृतो भवति। आत्मनः आत्मघातस्य भावनां निन्दयन् सः चिन्तयति यत् यद्येष पिपीलक: सततप्रयासेन सफल: भवितुं शक्नोति तर्हि न किमपि असम्भवं जगति। एतद्विचिन्त्य सः पठनस्य पुनः पुनरभ्यासं कुर्वन् कक्षायां विशिष्टं स्थान प्राप्तवान्। तस्मिन् एतत् परिवर्तनं दृष्ट्वा शिक्षकः तस्य प्रशंसां कुर्वन् बोधयति-"वत्स! वीरभोग्या वसुन्धरा। वसुधायां बहूनि वस्तूनि सन्ति परन्तु परिश्रमशीलाः वीराः एव तानि प्राप्नुवन्ति।"
Solution:

यह प्रश्न एक गद्यांश पर आधारित है, जिसमें सुवीर नामक छात्र की कहानी बताई गई है। सुवीर पढ़ाई को अरुचिकर समझकर हतोत्साहित हो जाता है और उसके मन में आत्महत्या के विचार आने लगते हैं। तभी वह एक चींटी को देखता है जो बार-बार गिरकर भी लगातार प्रयास से दीवार पर चढ़कर मिठाई प्राप्त करती है। चींटी के इस दृढ़ संकल्प को देखकर सुवीर को प्रेरणा मिलती है कि यदि चींटी निरंतर प्रयास से सफल हो सकती है, तो संसार में कुछ भी असंभव नहीं है। इस विचार से प्रेरित होकर, सुवीर ने पढ़ाई का बार-बार अभ्यास किया और कक्षा में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया। उसके शिक्षक ने उसकी प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पृथ्वी वीरों के लिए है और केवल परिश्रमी वीर ही इसे प्राप्त करते हैं।

अभ्यासः

अभ्यासः
  1. एकपदेन उत्तरत-
  • (क) कः हतोत्साहः अभवत्?
  • (ख) असफलतायाः कारणात् सुवीरस्य मनसि कस्य भावना जागृता?
  • (ग) पिपीलकः भित्तिौ किं प्राप्नोति?
  • (घ) सुवीरः पुनः पुनरभ्यासेन किं स्थान प्राप्तवान्?
Solution:
  1. (क) सुवीरः
  2. (ख) आत्मघातस्य
  3. (ग) मिष्टान्नम्
  4. (घ) विशिष्टम्

स्पष्टीकरण: गद्यांश के अनुसार, सुवीर असफलता के कारण हतोत्साहित हो गया था। उसने एक चींटी को दीवार पर चढ़ते हुए देखा जो बार-बार गिरकर भी अंततः मिष्टान्न प्राप्त कर लेती है। इस प्रेरणा से सुवीर ने निरंतर अभ्यास किया और कक्षा में विशिष्ट स्थान प्राप्त किया।

अभ्यासः

अभ्यासः
  1. पूर्णवाक्येन उत्तरत-
  • (क) सुवीरः आत्मघातस्य भावनां निन्दयन् किं चिन्तयति?
  • (ख) के वसुधायां वसूनि प्राप्नुवन्ति?
Solution:
  1. (क) सुवीरः आत्मघातस्य भावनां निन्दयन् चिन्तयति यत् यदि यह पिपीलक (चींटी) सततप्रयासेन सफलः भवितुं शक्तनोति, तर्हि संसार में कुछ भी असंभव नहीं है।
  2. (ख) परिश्रमशीलाः वीराः (परिश्रमी वीर) ही वसुधायां (पृथ्वी पर) वसूनि (धन-सम्पदा) प्राप्नुवन्ति।

स्पष्टीकरण: पूर्ण वाक्य में उत्तर देने के लिए, गद्यांश से सीधे वाक्यों को उद्धृत किया गया है। पहला उत्तर सुवीर के विचारों को दर्शाता है, और दूसरा उत्तर शिक्षक के कथन पर आधारित है जो परिश्रम के महत्व पर जोर देता है।

अभ्यासः

अभ्यासः
  1. यथानिर्देशम् उत्तरत-
  • (क) 'स: अन्ततः भित्तिम् आरोहति'-अत्र किम् अव्यय-पदम्?
  • (ख) 'संसारे' इति पदस्य किं समानार्थकपदम् अनुच्छेदे प्रयुक्तम्?
  • (ग) 'तस्य विवेकः जागृतः अभवत्'-अत्र किं कर्तृपदम्?
  • (घ) 'वसुधायां बहूनि वसूनि सन्ति' – अत्र किं विशेषणपदम्?
Solution:
  1. (क) 'अन्ततः' यह एक अव्यय पद है, जिसका अर्थ है 'अंत में' या 'आखिरकार'।
  2. (ख) अनुच्छेद में 'संसारे' (संसार में) के समानार्थक शब्द के रूप में 'जगति' (संसार में) का प्रयोग किया गया है।
  3. (ग) 'तस्य विवेकः जागृतः अभवत्' (उसका विवेक जागृत हुआ) इस वाक्य में 'विवेकः' (विवेक) कर्तृपद है, क्योंकि इसी के जागृत होने की क्रिया बताई गई है।
  4. (घ) 'वसुधायां बहूनि वसूनि सन्ति' (पृथ्वी पर बहुत सी वस्तुएँ हैं) इस वाक्य में 'बहूनि' (बहुत सी) विशेषण पद है, जो 'वसूनि' (वस्तुओं) की संख्या बता रहा है।

स्पष्टीकरण: यह प्रश्न गद्यांश से व्याकरणिक तत्वों की पहचान करने पर केंद्रित है। अव्यय वे शब्द होते हैं जो लिंग, वचन, कारक आदि के कारण परिवर्तित नहीं होते। समानार्थक शब्द वे होते हैं जिनके अर्थ समान होते हैं। कर्तृपद वह होता है जो क्रिया को करता है, और विशेषण वह शब्द है जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है।

प्रश्न 2. 'आत्मघातः कस्याः अपि समस्यायाः समाधानं न भवति' एतद्विषयम् अधिकृत्य एकम् लघुम् अनुच्छेद लिखत-

'आत्मघातः कस्याः अपि समस्यायाः समाधानं न भवति' एतद्विषयम् अधिकृत्य एकम् लघुम् अनुच्छेद लिखत-
Solution:

आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर अपराध और कायरता का कार्य है। जो व्यक्ति जीवन की कठिनाइयों का सामना करने के बजाय आत्महत्या का रास्ता चुनता है, वह न केवल स्वयं को कष्ट देता है, बल्कि अपने परिवार और प्रियजनों को भी असहनीय पीड़ा में छोड़ जाता है। आत्महत्या करने से समस्याएँ समाप्त नहीं होतीं, बल्कि वे वैसी ही बनी रहती हैं या और बढ़ जाती हैं, और मरने वाले व्यक्ति के लिए समाज में कोई सम्मान नहीं रह जाता। इसलिए, हमें कभी भी निराशा में आकर ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए। इसके बजाय, हमें समस्याओं का सामना करना चाहिए, उनसे सीखना चाहिए और समाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए। मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में, हमें मित्रों, परिवार या विशेषज्ञों से सहायता लेनी चाहिए। जीवन अनमोल है और हर समस्या का समाधान संभव है, यदि हम सकारात्मक दृष्टिकोण रखें और प्रयास करें।

प्रश्न 3. 'पठनस्य के लाभाः' – इति वर्णनं कुर्वन्तः मित्रं प्रति पत्रमेकं लिखत-

'पठनस्य के लाभाः' – इति वर्णनं कुर्वन्तः मित्रं प्रति पत्रमेकं लिखत-
Solution:

<u>छात्रावासः</u>

त्रिभुवन विद्यालयः आरा नगरम्

बिहार प्रदेशः

दिनांक : [आज की तारीख डालें]

प्रिय मित्र [मित्र का नाम डालें],

सप्रेम नमस्कार!

आशा है तुम सकुशल होगे। मैं यहाँ छात्रावास में कुशलतापूर्वक हूँ और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूँ। आज मैं तुम्हें पत्र लिखने का उद्देश्य हमारे जीवन में पठन (पढ़ने) के महत्व और लाभों के बारे में बताना है।

पढ़ना केवल एक शौक या समय बिताने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे ज्ञान को बढ़ाता है, हमारी सोच को विस्तृत करता है और हमें विभिन्न संस्कृतियों और विचारों से अवगत कराता है। पुस्तकें हमें नए कौशल सीखने, दुनिया को बेहतर ढंग से समझने और अपनी कल्पना शक्ति को उड़ान देने में मदद करती हैं।

जब हम पढ़ते हैं, तो हम विभिन्न पात्रों के अनुभवों से सीखते हैं, जिससे हमारी सहानुभूति और समझ बढ़ती है। यह हमें गंभीर रूप से सोचने और समस्याओं के समाधान खोजने की क्षमता विकसित करने में भी मदद करता है। इसके अतिरिक्त, नियमित पठन से हमारी शब्दावली समृद्ध होती है और लेखन कौशल में सुधार होता है, जो परीक्षाओं और भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसलिए, मैं तुम्हें प्रोत्साहित करता हूँ कि तुम नियमित रूप से पढ़ने की आदत डालो। चाहे वह कहानियाँ हों, उपन्यास हों, या ज्ञानवर्धक लेख हों, पढ़ना हमेशा फायदेमंद होता है।

अपने माता-पिता को मेरा सादर प्रणाम कहना।

तुम्हारा मित्र,

[आपका नाम डालें]

Common mistakes

  • Misinterpreting the meaning of words in the passage.
  • Failing to provide complete answers in full sentences where required.
  • Incorrectly identifying grammatical terms.
  • Not adhering to the formal structure of a letter.

Revision tips

  • Read the passage carefully multiple times to grasp the context and details.
  • Practice answering questions in full sentences to improve writing fluency.
  • Pay attention to the structure and tone required for essay and letter writing.
  • Review the grammatical terms and their usage in the provided examples.

Practice MCQs

Q1. अनुच्छेद के अनुसार, सुवीर को हतोत्साहित किसने किया?

Q2. पिपीलक (चींटी) ने भित्ति पर चढ़कर क्या प्राप्त किया?

Q3. सुवीर ने चींटी से क्या प्रेरणा ली?

Q4. लघु अनुच्छेद के अनुसार, आत्महत्या क्या है?

Q5. पत्र लेखन में, मित्र को पठन के कौन से लाभ बताए गए हैं?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान CBSE कक्षा 10 के 'अभ्यासवान् भवः' पुस्तक के अध्याय 13 'मिश्रिताभ्यासः' के लिए है।

अध्याय 13 में मुख्य रूप से किन अभ्यासों को शामिल किया गया है?

अध्याय 13 में एक गद्यांश पर आधारित प्रश्न, आत्महत्या को समस्या का समाधान न मानने पर एक लघु अनुच्छेद और पढ़ने के लाभों पर मित्र को पत्र लिखने का अभ्यास शामिल है।

गद्यांश का मुख्य संदेश क्या है?

गद्यांश का मुख्य संदेश यह है कि निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प से किसी भी असफलता पर विजय प्राप्त की जा सकती है, जैसा कि चींटी के उदाहरण से दर्शाया गया है।

आत्महत्या के विषय पर अनुच्छेद क्या सिखाता है?

अनुच्छेद सिखाता है कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह एक अपराध है और इससे व्यक्ति और उसके परिवार को सम्मान नहीं मिलता।

पत्र लेखन अभ्यास में क्या सिखाया गया है?

पत्र लेखन अभ्यास में मित्र को संबोधित करते हुए पढ़ने के विभिन्न लाभों, जैसे ज्ञान वृद्धि और व्यक्तिगत विकास, का वर्णन करना सिखाया गया है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान छात्रों को गद्यांश को समझने, अपने विचारों को अनुच्छेद और पत्र के रूप में व्यक्त करने तथा व्याकरण के नियमों को समझने में मदद करके परीक्षा की तैयारी में सहायक होंगे।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.