CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 9: संगतकार NCERT Solutions
This chapter, 'संगतकार' (Accompanist) from CBSE Class 10 Hindi Kshitij, delves into the often-unseen contributions of supporting artists and individuals who play a crucial role in the success of a main performer. Through the metaphor of a singer's accompanist, the poet Mangalesh Dabral highlights the significance of those who lend their support without seeking the spotlight. The solutions explain the various ways an accompanist assists a lead singer, the importance of humility and self-effacement in supporting roles, and how these individuals contribute to the overall success in various fields beyond music. These NCERT Solutions are designed to help students understand the nuances of teamwork and the value of every contribution, aiding in their exam preparation by clarifying complex themes and providing detailed answers to chapter-related questions.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | Hindi Kshitiz |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 9 |
Chapter summary
Chapter 9 of CBSE Class 10 Hindi Kshitij, 'संगतकार', focuses on the role and significance of accompanists and supporting individuals in any field. The NCERT Solutions provided here break down the poet's message about the humility, support, and essential contributions of those who work behind the scenes. Students will learn about the various ways an accompanist aids a lead singer and understand the broader application of this concept in different professions, reinforcing the idea that success is often a collective effort.
Learning outcomes
- Understand the symbolic meaning of the 'संगतकार' (accompanist) in the poem.
- Identify the various ways an accompanist supports a lead singer.
- Analyze the poet's message about humility and the importance of supporting roles.
- Relate the concept of the accompanist to other professional fields.
- Appreciate the value of teamwork and collective effort in achieving success.
Topics covered
Paper topics
- Role of the accompanist
- Support in artistic fields
- Humility and self-effacement
- Humanity in supporting roles
- Teamwork and collaboration
- Contribution of supporting artists
- Significance of background performers
- Metaphor of the accompanist
- Success as a collective effort
- Poetic interpretation of supporting roles
Important topics
- The symbolic meaning of the 'संगतकार'
- The accompanist's role in supporting the main artist
- The concept of 'मनुष्यता' as shown by the accompanist
- Examples of supporting roles in different professions
- The importance of humility in success
PDF preview
Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.
Questions and Solutions
प्रश्न 1
कवि 'संगतकार' के माध्यम से उन सभी व्यक्तियों की ओर संकेत कर रहा है जो किसी भी कार्य या कला के क्षेत्र में मुख्य कलाकार या व्यक्ति का सहयोग करते हैं। ये वे सहायक होते हैं जो मुख्य व्यक्ति की प्रतिभा को निखारने में मदद करते हैं, जैसे कि संगीत में मुख्य गायक का साथ देने वाला संगतकार। वे स्वयं प्रसिद्धि की चकाचौंध से दूर रहकर, मुख्य कलाकार के सुरों में सुर मिलाकर उसके गायन को और अधिक प्रभावशाली बनाते हैं, और इसका सारा श्रेय मुख्य गायक को ही मिलने देते हैं।
प्रश्न 2
संगतकार जैसी भूमिका निभाने वाले व्यक्ति संगीत के अलावा कई अन्य क्षेत्रों में भी देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए:
- सिनेमा जगत में: फिल्म निर्माण में अनेक सह-कलाकार, सहायक निर्देशक, पार्श्व गायक, संगीतकार, गीतकार, नृत्य निर्देशक, स्टंटमैन और अन्य तकनीशियन होते हैं जो मुख्य अभिनेता या निर्देशक के साथ मिलकर फिल्म को सफल बनाते हैं।
- भवन निर्माण क्षेत्र में: बड़े भवनों के निर्माण में मुख्य ठेकेदार या आर्किटेक्ट के साथ-साथ अनगिनत मजदूर, कारीगर और पर्यवेक्षक होते हैं जो दिन-रात मेहनत करके उस भव्य संरचना को साकार करते हैं।
- लेखन और प्रकाशन: किसी प्रसिद्ध लेखक की पुस्तक को संपादित करने वाले संपादक, प्रूफरीडर और प्रकाशक भी अप्रत्यक्ष रूप से सहायक की भूमिका निभाते हैं।
- खेलकूद: किसी टीम के खिलाड़ी, कोच और सहायक स्टाफ भी अपने-अपने स्तर पर मुख्य खिलाड़ी या टीम की सफलता में योगदान देते हैं।
इन सभी क्षेत्रों में, संगतकार की तरह ही, सहायक व्यक्ति मुख्य व्यक्ति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, भले ही उन्हें वह प्रसिद्धि न मिले।
प्रश्न 3
संगतकार मुख्य गायक-गायिकाओं की कई महत्वपूर्ण तरीकों से मदद करते हैं, जिससे उनका गायन और भी प्रभावशाली और सुगम हो जाता है:
- स्वर को मधुरता देना: यदि मुख्य गायक का स्वर कभी भारी या थका हुआ लगे, तो संगतकार अपनी मधुर और संतुलित आवाज़ से उसमें जान डाल देता है, जिससे गायन की समग्र गुणवत्ता बनी रहती है।
- जटिल तानों को संभालना: जब मुख्य गायक अंतरे की जटिल तानों या आलापों में खो जाता है और अपनी मूल धुन से थोड़ा भटकने लगता है, तो संगतकार मुख्य धुन (स्थायी) को गाता रहता है। इस प्रकार, वह गायक को वापस सही लय और धुन पर लाने में मदद करता है।
- लय और सुर का संतुलन: यदि मुख्य गायक गायन के दौरान अपनी लय से भटक जाता है या अनजाने में गलत सुर लगा बैठता है, तो संगतकार अपनी आवाज़ से उस भटकाव को सँभालता है और गायन को पटरी पर बनाए रखता है।
- तारसप्तक में सहारा देना: जब मुख्य गायक ऊँचे सुरों (तारसप्तक) में गाते हुए अपनी आवाज़ की ऊँचाई या शक्ति को बनाए रखने में संघर्ष करता है और उसका स्वर बिखरने लगता है, तब संगतकार मुख्य धुन को दोहराकर और अपने स्वर को मिलाकर गायक को सहारा देता है, जिससे उसका प्रदर्शन जारी रह सके।
प्रश्न 4
प्रस्तुत पंक्तियों में कवि मंगलेश डबराल ने संगतकार के चरित्र की एक महत्वपूर्ण विशेषता को उजागर किया है। कवि कहता है कि जब संगतकार मुख्य गायक के साथ गाता है, तो उसकी आवाज़ में एक प्रकार की हिचक या संकोच स्पष्ट रूप से सुनाई देता है। यह हिचक इसलिए है क्योंकि वह जानबूझकर अपने स्वर को मुख्य गायक के स्वर से ऊँचा नहीं उठाता। वह अपनी प्रतिभा और क्षमता होते हुए भी स्वयं को मुख्य गायक से आगे नहीं आने देता।
कवि इस हिचक या स्वर को ऊँचा न उठाने की कोशिश को संगतकार की 'विफलता' (असफलता) नहीं मानता। इसके विपरीत, कवि इसे उसकी 'मनुष्यता' का प्रमाण मानता है। इसका अर्थ यह है कि संगतकार अपनी कलात्मक श्रेष्ठता को प्रदर्शित करने के बजाय, मुख्य गायक के प्रति सम्मान, विनम्रता और सहयोग की भावना रखता है। वह जानता है कि उसकी भूमिका मुख्य गायक को सहारा देना है, न कि उससे आगे निकल जाना। यह गुण, यानी अपनी शक्ति और प्रतिभा का प्रदर्शन न करके दूसरों को महत्व देना, ही उसकी महानता और मानवीयता को दर्शाता है।
प्रश्न 5
यह कथन बिल्कुल सत्य है कि किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले व्यक्ति की सफलता के पीछे अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। वे सहायक व्यक्ति अपनी मेहनत, कौशल और समर्पण से उस प्रसिद्ध व्यक्ति को शिखर तक पहुँचाने में मदद करते हैं।
उदाहरण: एक प्रसिद्ध गायक
जब कोई गायक अपनी गायकी से प्रसिद्धि की ऊँचाइयों को छूता है, तो उसके पीछे केवल उसकी अपनी प्रतिभा ही नहीं होती। उस सफलता में कई अन्य लोगों का भी योगदान होता है, जैसे:
- संगीतकार/संगीत निर्देशक: जो गायक के लिए धुनें तैयार करते हैं और उसे सही संगीत प्रदान करते हैं।
- गीतकार: जो सुंदर और अर्थपूर्ण गीत लिखते हैं।
- वाद्य यंत्र बजाने वाले (संगतकार): जो गायक के साथ सुर और लय का सामंजस्य बिठाते हैं।
- ध्वनि इंजीनियर/तकनीशियन: जो रिकॉर्डिंग और मिक्सिंग के दौरान ध्वनि की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
- निर्माता/प्रस्तोता: जो गायक को मंच या अवसर प्रदान करते हैं और उसके एल्बम या प्रदर्शन को प्रायोजित करते हैं।
- प्रशिक्षक/गुरु: जिन्होंने गायक को संगीत की शिक्षा दी और उसे निखारा।
इन सभी के सामूहिक प्रयास और सहयोग के बिना, एक गायक के लिए अकेले प्रसिद्धि के शिखर तक पहुँचना अत्यंत कठिन होता है। संगतकार की तरह, ये सभी सहायक व्यक्ति भी उस प्रसिद्ध व्यक्ति की सफलता में भागीदार होते हैं, भले ही उन्हें मुख्य कलाकार जितनी पहचान न मिले।
प्रश्न 6
तारसप्तक में गायन करते समय मुख्य गायक को अपनी आवाज़ को बहुत ऊँचाई तक ले जाना पड़ता है। यह एक अत्यंत कठिन कार्य होता है, और कई बार गायक की आवाज़ की शक्ति या नियंत्रण कम पड़ने लगता है, जिससे उसका स्वर बिखरने लगता है या टूटता हुआ प्रतीत होता है। ऐसी नाजुक स्थिति में संगतकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष हो जाती है।
जब मुख्य गायक का स्वर बिखरने लगता है, तो संगतकार:
- मुख्य धुन को दोहराता है: वह मुख्य धुन या स्थायी को लगातार गाता रहता है, जिससे गायक को यह याद रहता है कि उसे किस धुन पर लौटना है।
- सहारा देता है: अपनी आवाज़ से वह गायक के बिखरे हुए स्वर को सहारा देता है, उसे स्थिरता प्रदान करता है और गायन को टूटने से बचाता है।
- लय और सुर को बनाए रखता है: वह अपनी आवाज़ के माध्यम से गायन की लय और सुर को बनाए रखने में मदद करता है, ताकि प्रदर्शन पूरी तरह से न बिगड़े।
इस प्रकार, संगतकार न केवल मुख्य गायक का साथ देता है, बल्कि उसकी कलात्मक कमजोरी के क्षणों में एक मजबूत सहारे के रूप में कार्य करता है, जिससे पूरा गायन प्रदर्शन सफलतापूर्वक संपन्न हो पाता है। यह उसकी कलात्मक संवेदनशीलता और मुख्य कलाकार के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
प्रश्न 7
सफलता के शिखर पर पहुँचने के दौरान व्यक्ति का लड़खड़ाना एक आम बात हो सकती है, क्योंकि इस स्तर पर जिम्मेदारियाँ, दबाव और अपेक्षाएँ बहुत बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में सहयोगी व्यक्ति ढाल बनकर खड़े होते हैं और उन्हें कई तरह से संभालते हैं:
- मानसिक संबल प्रदान करना: सहयोगी व्यक्ति अपने शब्दों और व्यवहार से उस व्यक्ति का मनोबल बढ़ाते हैं। वे उसे याद दिलाते हैं कि वह कितना सक्षम है और उसने अब तक क्या हासिल किया है।
- मार्गदर्शन देना: वे अनुभवी होने के नाते या स्थिति को निष्पक्ष रूप से देखकर, सही सलाह और मार्गदर्शन देते हैं। वे समस्या की जड़ों को समझने में मदद करते हैं और समाधान के रास्ते सुझाते हैं।
- प्रेरणा स्रोत बनना: वे उस व्यक्ति को फिर से उठने और प्रयास करने के लिए प्रेरित करते हैं। वे उसे यह विश्वास दिलाते हैं कि असफलताएँ सीखने का हिस्सा हैं और उनसे घबराने की आवश्यकता नहीं है।
- व्यावहारिक सहायता: कभी-कभी, सहयोगी केवल भावनात्मक या मानसिक सहारा ही नहीं देते, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी मदद करते हैं, जैसे कि किसी कार्यभार को बाँटना या किसी विशेष समस्या को हल करने में प्रत्यक्ष सहायता करना।
- धैर्य सिखाना: वे व्यक्ति को धैर्य रखने और जल्दबाजी में कोई निर्णय न लेने की सलाह देते हैं, जिससे वह शांत रहकर सही कदम उठा सके।
संक्षेप में, सहयोगी व्यक्ति एक मजबूत स्तंभ की तरह कार्य करते हैं, जो न केवल गिरने से बचाते हैं, बल्कि गिरने के बाद फिर से खड़े होने और आगे बढ़ने की हिम्मत भी देते हैं। वे उस व्यक्ति की खोई हुई आत्मशक्ति को पुनः प्राप्त करने में मदद करते हैं।
Common mistakes
- Overlooking the importance of supporting roles in success.
- Confusing the accompanist's hesitation with a lack of skill.
- Failing to connect the poem's theme to real-world scenarios.
- Interpreting the accompanist's actions solely as subservience rather than humaneness.
Revision tips
- Read the poem 'संगतकार' carefully to grasp the poet's central theme.
- Focus on understanding the specific examples given in the solutions about how an accompanist helps.
- Think about other professions where similar supporting roles exist and how they contribute.
- Pay attention to the explanation of the lines about the accompanist's 'hesitation' and 'humaneness'.
- Use the solutions to practice explaining the poet's message in your own words.
Practice MCQs
Q1. कविता में 'संगतकार' के माध्यम से कवि किन व्यक्तियों की ओर संकेत करता है?
Explanation: कवि संगतकार के माध्यम से उन सभी सहायक व्यक्तियों की ओर संकेत करता है जो किसी भी कार्य या कला में मुख्य व्यक्ति का सहयोग करते हैं और स्वयं प्रसिद्धि की ओर अग्रसर नहीं होते।
Q2. संगतकार मुख्य गायक की किस प्रकार सहायता करता है?
Explanation: संगतकार मुख्य गायक के सुरों में अपना सुर मिलाकर, स्वर भारी होने पर मधुरता भरकर, और लय भटकने पर उसे संभालकर सहायता करता है।
Q3. संगतकार की आवाज़ में सुनाई देने वाली 'हिचक' को कवि क्या समझने की सलाह देता है?
Explanation: कवि संगतकार की आवाज़ में सुनाई देने वाली हिचक को उसकी असफलता या कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी मनुष्यता का प्रमाण मानता है, क्योंकि वह अपनी प्रतिभा को मुख्य गायक पर हावी नहीं होने देता।
Q4. संगतकार जैसे सहायक व्यक्ति किन क्षेत्रों में पाए जाते हैं?
Explanation: संगतकार की भूमिका केवल संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि सिनेमा में सह-कलाकार, भवन निर्माण में मजदूर आदि के रूप में भी ऐसे सहायक व्यक्ति मिलते हैं।
Q5. जब मुख्य गायक तारसप्तक पर गाते हुए बिखरने लगता है, तब संगतकार क्या करता है?
Explanation: तारसप्तक पर मुख्य गायक का स्वर बिखरने लगता है, तब संगतकार मुख्य धुन को दोहराते हुए अपनी आवाज़ से उस बिखराव को संभालता है और गायक को सहारा देता है।
Frequently asked questions
What is the main theme of Chapter 9, 'संगतकार'?
The main theme of Chapter 9, 'संगतकार', is to highlight the crucial yet often unrecognized contributions of supporting individuals and artists who play a vital role in the success of a main performer or in any collaborative effort.
Who is a 'संगतकार' according to the poem?
According to the poem, a 'संगतकार' is an accompanist or a supporting artist who aids the main performer (like a lead singer) by blending their own skills and voice, ensuring the main artist's performance is enhanced and supported.
How does the poet describe the accompanist's hesitation?
The poet describes the accompanist's hesitation not as a failure or weakness, but as a sign of their 'मनुष्यता' (humanity). This hesitation comes from not wanting to overshadow the main artist, showing respect and humility.
Can the concept of a 'संगतकार' be applied outside of music?
Yes, the concept of a 'संगतकार' can be applied to many other fields. The solutions provide examples like co-actors in films or laborers in construction, illustrating that supporting roles are essential everywhere.
What is the significance of the accompanist when the main singer falters?
When the main singer falters, especially at high notes (तारसप्तक), the accompanist plays a critical role by repeating the main tune and using their voice to support and stabilize the singer, preventing the performance from falling apart.
How do these NCERT Solutions help students?
These NCERT Solutions provide clear, detailed, and rewritten answers to all questions from Chapter 9. They help students understand the poem's deeper meanings, analyze the poet's message, and prepare effectively for their Hindi exams.
Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy
NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.