कक्षा 11 राजनीति विज्ञान अध्याय 6: न्यायपालिका NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 11 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6, 'न्यायपालिका' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के विभिन्न तरीकों पर चर्चा की गई है, जिसमें न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया और उनके कार्यकाल की सुरक्षा शामिल है। समाधान यह भी स्पष्ट करते हैं कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि वह किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है, बल्कि यह संविधान और जनता के प्रति उत्तरदायी है। यह अध्याय भारत की लोकतांत्रिक संरचना में न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका, उसके अधिकारों की रक्षा करने की क्षमता और सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों की शक्तियों पर प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त समझ प्रदान करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectराजनीति विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. न्यायपालिका

Chapter summary

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6 के ये NCERT समाधान न्यायपालिका की अवधारणा पर केंद्रित हैं। इसमें न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के संवैधानिक प्रावधानों, जैसे न्यायाधीशों की नियुक्ति और निष्कासन की प्रक्रिया, का विश्लेषण किया गया है। समाधान यह भी स्पष्ट करते हैं कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ जवाबदेही की कमी नहीं है, बल्कि यह संविधान और नागरिकों के प्रति उत्तरदायी है। यह अध्याय सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की शक्तियों और मौलिक अधिकारों की रक्षा में उनकी भूमिका को भी रेखांकित करता है।

Learning outcomes

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने वाले विभिन्न तरीकों को समझना।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संबंध का विश्लेषण करना।
  • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की शक्तियों और भूमिकाओं की पहचान करना।
  • न्यायपालिका द्वारा मौलिक अधिकारों की रक्षा के महत्व को समझना।
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति और निष्कासन की प्रक्रिया का वर्णन करना।

Topics covered

Paper topics

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया
  • न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया
  • सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ
  • उच्च न्यायालय की शक्तियाँ
  • अनुच्छेद 137: पुनरावलोकन की शक्ति
  • अनुच्छेद 144: सर्वोच्च न्यायालय की सहायता
  • अनुच्छेद 32: मौलिक अधिकारों की रक्षा
  • अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्ति
  • अनुच्छेद 13: कानूनों को गैर-संवैधानिक घोषित करना
  • न्यायपालिका की जवाबदेही
  • न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संरचना

Important topics

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ और उसे सुनिश्चित करने के उपाय
  • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की रिट जारी करने की शक्तियाँ (अनुच्छेद 32 और 226)
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति और निष्कासन की प्रक्रिया
  • न्यायपालिका की जवाबदेही और संविधान के प्रति उसकी भूमिका
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कानूनों को गैर-संवैधानिक घोषित करने की शक्ति

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के विभिन्न तरीके कौन-कौन से हैं? निम्नलिखित में जो बेमेल हो उसे छाँटें।
  • (क) सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से सलाह ली जाती है।
  • (ख) न्यायाधीशों को अमूमन अवकाश प्राप्ति की आयु से पहले नहीं हटाया जाता।
  • (ग) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता।
  • (घ) न्यायाधीशों की नियुक्ति में संसद की दखल नहीं है।
Solution:

न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कई संवैधानिक प्रावधान किए गए हैं ताकि न्यायाधीश बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्ष निर्णय ले सकें। इन प्रावधानों में शामिल हैं:

  1. न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया: सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति में भारत के मुख्य न्यायाधीश से सलाह ली जाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि नियुक्ति प्रक्रिया में अनुभव और विशेषज्ञता का ध्यान रखा जाए।
  2. कार्यकाल की सुरक्षा: न्यायाधीशों को अमूमन उनकी अवकाश प्राप्ति की आयु से पहले पद से नहीं हटाया जाता है। उन्हें केवल कदाचार या अक्षमता के आधार पर एक विशेष और कठिन प्रक्रिया के माध्यम से ही हटाया जा सकता है, जो उनकी स्वतंत्रता को बनाए रखता है।
  3. संसद की सीमित भूमिका: न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में संसद की सीधी दखल नहीं होती है, जिससे राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना कम हो जाती है।

दिए गए विकल्पों में से, विकल्प (ग) 'उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता' न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने का तरीका नहीं है, बल्कि यह एक बेमेल कथन है। वास्तव में, न्यायाधीशों का तबादला किया जा सकता है, हालांकि यह प्रक्रिया भी निष्पक्षता को ध्यान में रखकर की जाती है। इसलिए, यह कथन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के बजाय उसकी कार्यप्रणाली के बारे में एक गलत धारणा प्रस्तुत करता है।

सही उत्तर है: (ग)

प्रश्न 2

क्या न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ यह है कि न्यायपालिका किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। अपना उत्तर अधिकतम 100 शब्दों में लिखें।
Solution:

न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि वह किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है। स्वतंत्रता का अर्थ है कि न्यायपालिका अपने निर्णयों में निष्पक्ष हो और किसी बाहरी दबाव, जैसे कि सरकार या विधायिका, से प्रभावित न हो। हालांकि, न्यायपालिका संविधान, देश के कानूनों और अंततः जनता के प्रति जवाबदेह है। यह अपने निर्णयों के माध्यम से संविधान की व्याख्या करती है और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करती है। यदि न्यायपालिका अपने कर्तव्यों का पालन ठीक से नहीं करती है, तो उसे भी संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जवाबदेह ठहराया जा सकता है, जैसे कि न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया। इसलिए, स्वतंत्रता और जवाबदेही साथ-साथ चलती हैं।

Common mistakes

  • यह मानना कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ जवाबदेही से मुक्ति है।
  • न्यायाधीशों के तबादले से संबंधित नियमों को गलत समझना।
  • न्यायपालिका की शक्तियों और सीमाओं के बीच अंतर करने में कठिनाई।

Revision tips

  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को सूचीबद्ध करें।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच के अंतर को स्पष्ट करें।
  • न्यायाधीशों की नियुक्ति और निष्कासन की प्रक्रिया के चरणों को समझें।
  • न्यायपालिका द्वारा मौलिक अधिकारों की रक्षा के उदाहरणों पर ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन सा कथन न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने का एक तरीका नहीं है?

Q2. अनुच्छेद 137 सर्वोच्च न्यायालय को कौन सी शक्ति प्रदान करता है?

Q3. न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ क्या है?

Q4. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय कौन सी रिट जारी कर सकता है?

Frequently asked questions

कक्षा 11 राजनीति विज्ञान के अध्याय 6 में मुख्य रूप से क्या समझाया गया है?

इस अध्याय में भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता, उसकी शक्तियों, न्यायाधीशों की नियुक्ति और निष्कासन की प्रक्रिया, तथा मौलिक अधिकारों की रक्षा में उसकी भूमिका को समझाया गया है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या अर्थ है?

न्यायपालिका की स्वतंत्रता का अर्थ है कि न्यायपालिका बिना किसी बाहरी दबाव, जैसे कि सरकार या विधायिका, के निष्पक्ष रूप से कार्य कर सके। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है; वह संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह है।

सर्वोच्च न्यायालय अपने निर्णयों की समीक्षा कैसे कर सकता है?

अनुच्छेद 137 के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश का पुनरावलोकन करने की शक्ति है, जिसका अर्थ है कि वह अपने पिछले निर्णयों की समीक्षा कर सकता है।

क्या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में किया जा सकता है?

स्रोत के अनुसार, यह कथन कि 'उच्च न्यायालय के न्यायाधीश का तबादला दूसरे उच्च न्यायालय में नहीं किया जा सकता' गलत है। वास्तव में, न्यायाधीशों का तबादला किया जा सकता है।

न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय किए गए हैं?

न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश से सलाह लेना, न्यायाधीशों को आसानी से पद से न हटाना, और न्यायाधीशों की नियुक्ति में संसद की दखल न होना जैसे उपाय किए गए हैं।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.