कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 2 - दो ध्रुवीयता का अंत NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 2, 'दो ध्रुवीयता का अंत' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति, सोवियत संघ के विघटन के कारण और परिणाम, और प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं जैसे रूसी क्रांति, बर्लिन की दीवार का गिरना, और अफगान संकट के कालानुक्रमिक क्रम को समझने में मदद करने वाले उत्तर शामिल हैं। समाधानों में मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा शुरू किए गए सुधारों, शॉक थेरेपी जैसे आर्थिक मॉडल, और वारसॉ संधि जैसे सैन्य गठबंधनों पर भी प्रकाश डाला गया है। यह सामग्री छात्रों को सोवियत संघ के पतन के जटिल कारणों और वैश्विक शक्ति संतुलन पर इसके प्रभाव को समझने में सहायता करती है, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | राजनीति विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 2. दो ध्रुवीयता का अंत |
Chapter summary
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 2, 'दो ध्रुवीयता का अंत' के लिए ये NCERT समाधान सोवियत संघ के विघटन से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं। इसमें सोवियत अर्थव्यवस्था की विशेषताओं, विघटन के कारणों और परिणामों, और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के कालानुक्रमिक क्रम पर प्रश्न शामिल हैं। समाधान छात्रों को मिखाइल गोर्बाचेव के सुधारों, शॉक थेरेपी और वारसॉ संधि जैसी महत्वपूर्ण शब्दावली को समझने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं को समझना।
- सोवियत संघ के विघटन के कारणों और परिणामों की पहचान करना।
- प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं को कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करना।
- मिखाइल गोर्बाचेव के सुधारों के महत्व का विश्लेषण करना।
- वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव को समझना।
Topics covered
Paper topics
- सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति
- सोवियत संघ का विघटन
- वैश्विक शक्ति संतुलन
- मिखाइल गोर्बाचेव के सुधार
- शॉक थेरेपी
- वारसॉ संधि
- रूसी क्रांति
- बर्लिन की दीवार का गिरना
- अफगान संकट
- स्वतंत्र राज्यों का राष्ट्रकुल (सीआईएस)
Important topics
- सोवियत संघ के विघटन के कारण और परिणाम
- दो ध्रुवीय विश्व व्यवस्था का अंत
- मिखाइल गोर्बाचेव की भूमिका और सुधार
- शॉक थेरेपी का आर्थिक मॉडल
- शीत युद्ध का अंत और उसके प्रभाव
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) सोवियत अर्थव्यवस्था में समाजवाद प्रभावी विचारधारा थी।
- (ख) उत्पादन के साधनों पर राज्य का स्वामित्व/नियंत्रण होना।
- (ग) जनता को आर्थिक आज़ादी थी।
- (घ) अर्थव्यवस्था के हर पहलू का नियोजन और नियंत्रण राज्य करता था।
सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति को समझने के लिए, हमें उसकी मुख्य विशेषताओं पर ध्यान देना होगा। सोवियत संघ में, समाजवाद एक प्रमुख विचारधारा थी, और उत्पादन के साधनों जैसे कारखानों और भूमि पर राज्य का स्वामित्व और नियंत्रण होता था। अर्थव्यवस्था के सभी पहलुओं, जैसे उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण, का राज्य द्वारा नियोजन और नियंत्रण किया जाता था। इस व्यवस्था में, जनता को व्यापक आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त नहीं थी; उनकी आर्थिक गतिविधियाँ राज्य के नियमों और योजनाओं द्वारा सीमित थीं। इसलिए, यह कथन कि 'जनता को आर्थिक आज़ादी थी' ग़लत है।
सही उत्तर है: (ग) जनता को आर्थिक आज़ादी थी।
प्रश्न 2
- (क) अफगान-संकट
- (ख) बर्लिन-दीवार का गिरना
- (ग) सोवियत संघ का विघटन
- (घ) रूसी क्रांति
इन घटनाओं को उनके घटित होने के समय के अनुसार क्रमबद्ध करने पर निम्नलिखित क्रम प्राप्त होता है:
- रूसी क्रांति (घ): यह 1917 में हुई थी, जिसने सोवियत संघ की नींव रखी।
- अफगान-संकट (क): सोवियत संघ ने 1979 में अफगानिस्तान में हस्तक्षेप किया, जो 1989 तक चला।
- बर्लिन-दीवार का गिरना (ख): यह 1989 में हुआ, जो पूर्वी यूरोप में साम्यवाद के पतन का प्रतीक बना।
- सोवियत संघ का विघटन (ग): यह 1991 में हुआ, जिसने सोवियत संघ को समाप्त कर दिया।
अतः, सही कालानुक्रमिक क्रम है: (घ), (क), (ख), (ग)।
प्रश्न 3
- (क) संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत संघ के बीच विचारधारात्मक लड़ाई का अंत
- (ख) स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) का जन्म
- (ग) विश्व-व्यवस्था के शक्ति-संतुलन में बदलाव
- (घ) मध्यपूर्व में संकट
सोवियत संघ के विघटन के कई महत्वपूर्ण परिणाम हुए। इनमें से एक प्रमुख परिणाम संयुक्त राज्य अमरीका और सोवियत संघ के बीच चल रही विचारधारात्मक लड़ाई (शीत युद्ध) का अंत था। विघटन के बाद, सोवियत गणराज्यों ने मिलकर स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल (सीआईएस) का गठन किया। इसके अतिरिक्त, विश्व-व्यवस्था के शक्ति-संतुलन में भी बड़ा बदलाव आया, क्योंकि दो महाशक्तियों में से एक का अंत हो गया था। हालाँकि, मध्यपूर्व में संकट सोवियत संघ के विघटन का सीधा परिणाम नहीं था, यद्यपि वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों का इस क्षेत्र पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता था।
इसलिए, जो सोवियत संघ के विघटन का परिणाम नहीं है, वह है: (घ) मध्यपूर्व में संकट।
प्रश्न 4
- मिखाइल गोर्बाचेव
- शॉक थेरेपी
- लस (रूस)
- बोरिस येल्तसिन
- वारसॉ
- (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी
- (ख) सैन्य समझौता
- (ग) सुधारों की शुरुआत
- (घ) आर्थिक मॉडल
- (ङ) रूस के राष्ट्रपति
इनका सही मिलान इस प्रकार है:
- मिखाइल गोर्बाचेव - (ग) सुधारों की शुरुआत (उन्होंने 1985 में सोवियत संघ में आर्थिक और राजनीतिक सुधारों की शुरुआत की)।
- शॉक थेरेपी - (घ) आर्थिक मॉडल (यह साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण का एक तीव्र आर्थिक मॉडल था)।
- लस (रूस) - (क) सोवियत संघ का उत्तराधिकारी (रूस सोवियत संघ का सबसे बड़ा गणराज्य था और विघटन के बाद उसका उत्तराधिकारी बना)।
- बोरिस येल्तसिन - (ङ) रूस के राष्ट्रपति (वे सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस के पहले राष्ट्रपति बने)।
- वारसॉ - (ख) सैन्य समझौता (वारसॉ पैक्ट सोवियत संघ और उसके पूर्वी यूरोपीय सहयोगियों के बीच एक सैन्य गठबंधन था)।
प्रश्न 5
- (क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली ..... की विचारधारा पर आधारित थी।
- (ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबंधन ...... था।
- (ग) ...... पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
- (घ) ..... ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की।
- (ङ) ..... का गिरना शीतयुद्ध के अंत का प्रतीक था।
रिक्त स्थानों की पूर्ति इस प्रकार है:
- (क) सोवियत राजनीतिक प्रणाली समाजवाद की विचारधारा पर आधारित थी।
- (ख) सोवियत संघ द्वारा बनाया गया सैन्य गठबंधन वारसाँ पैक्ट था।
- (ग) कम्युनिस्ट पार्टी का सोवियत राजनीतिक व्यवस्था पर दबदबा था।
- (घ) मिखाइल गोर्बाचेव ने 1985 में सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत की।
- (ङ) बर्लिन की दीवार का गिरना शीतयुद्ध के अंत का प्रतीक था।
प्रश्न 6
सोवियत अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से रूस में, पूंजीवादी देशों जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था से कई महत्वपूर्ण विशेषताओं में भिन्न थी। यहाँ तीन मुख्य अंतर दिए गए हैं:
- स्वामित्व का स्वरूप: सोवियत संघ में, अर्थव्यवस्था पर सरकार का पूर्ण नियंत्रण था। उत्पादन के सभी प्रमुख साधन, जैसे कारखाने, भूमि, बैंक और व्यापार, राज्य के स्वामित्व में थे। इसके विपरीत, पूंजीवादी देशों में, उत्पादन के साधनों का स्वामित्व मुख्य रूप से निजी व्यक्तियों और निगमों के पास होता है, हालांकि सरकार का कुछ हद तक विनियमन होता है।
- आर्थिक नियोजन बनाम बाजार व्यवस्था: सोवियत अर्थव्यवस्था एक केंद्रीय नियोजित अर्थव्यवस्था थी, जहाँ सरकार यह तय करती थी कि क्या उत्पादन करना है, कितना उत्पादन करना है, और किस कीमत पर बेचना है। निजी लाभ की धारणा का अभाव था। पूंजीवादी अर्थव्यवस्थाएँ मुख्य रूप से बाजार शक्तियों (मांग और आपूर्ति) द्वारा संचालित होती हैं, जहाँ उत्पादक लाभ कमाने के उद्देश्य से उत्पादन करते हैं और कीमतें बाजार द्वारा निर्धारित होती हैं।
- निजी संपत्ति का अभाव: सोवियत संघ में निजी संपत्ति की अवधारणा बहुत सीमित थी। लोगों को केवल घरेलू उपयोग की वस्तुएँ और रहने के लिए मकान रखने की अनुमति थी, लेकिन कारखाने, भूमि या बड़े व्यावसायिक उद्यमों का निजी स्वामित्व संभव नहीं था। पूंजीवादी देशों में, निजी संपत्ति का अधिकार एक मौलिक सिद्धांत है, जो व्यक्तियों को संपत्ति खरीदने, बेचने और विरासत में देने की स्वतंत्रता देता है।
प्रश्न 7
मिखाइल गोर्बाचेव को सोवियत संघ में सुधारों की शुरुआत करने के लिए कई गंभीर कारणों से बाध्य होना पड़ा। जब उन्होंने 1985 में सत्ता संभाली, तो सोवियत संघ कई गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा था:
- गिरती हुई अर्थव्यवस्था: सोवियत अर्थव्यवस्था गंभीर मंदी के दौर से गुजर रही थी। विकास दर काफी कम हो गई थी, और उत्पादन की गुणवत्ता पश्चिमी देशों के उत्पादों की तुलना में बहुत निम्न स्तर की थी। वस्तुओं की कीमतें सब्सिडी के कारण कम रखी जाती थीं, जिससे सरकार को भारी घाटा हो रहा था। अपने गुट के देशों को आर्थिक और सैनिक सहायता देना भी कठिन होता जा रहा था।
- तकनीकी पिछड़ापन: पश्चिमी देशों की तुलना में सोवियत संघ तकनीकी रूप से पिछड़ रहा था, विशेषकर सूचना प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन में।
- प्रशासनिक भ्रष्टाचार और अक्षमता: सोवियत नौकरशाही में भ्रष्टाचार और अक्षमता व्याप्त थी, जिससे आर्थिक विकास और सामाजिक प्रगति बाधित हो रही थी।
- जनता की आकांक्षाएँ: पश्चिमी देशों की जीवनशैली और आर्थिक समृद्धि के बारे में जानकारी बढ़ने से सोवियत नागरिकों में भी बेहतर जीवन स्तर और अधिक स्वतंत्रता की आकांक्षाएँ बढ़ रही थीं।
इन सभी कारकों ने गोर्बाचेव को सोवियत व्यवस्था में सुधार लाने के लिए प्रेरित किया, ताकि अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया जा सके और देश को आधुनिक बनाया जा सके।
Common mistakes
- सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति को गलत समझना।
- विघटन के कारणों और परिणामों को भ्रमित करना।
- ऐतिहासिक घटनाओं के क्रम में त्रुटियाँ करना।
- शॉक थेरेपी और अन्य आर्थिक मॉडलों के बीच अंतर न कर पाना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को ध्यान से पढ़ें और मुख्य बिंदुओं को नोट करें।
- कालानुक्रमिक क्रम वाले प्रश्न का अभ्यास करें ताकि घटनाओं का क्रम याद रहे।
- सोवियत अर्थव्यवस्था और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था के बीच अंतर को समझें।
- मिखाइल गोर्बाचेव और बोरिस येल्तसिन की भूमिकाओं को स्पष्ट करें।
Practice MCQs
Q1. सोवियत अर्थव्यवस्था की निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता ग़लत है?
Explanation: सोवियत अर्थव्यवस्था में जनता को पूर्ण आर्थिक आज़ादी नहीं थी, बल्कि राज्य का अर्थव्यवस्था पर कड़ा नियंत्रण था।
Q2. निम्नलिखित घटनाओं को उनके सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें:
Explanation: सही क्रम है: रूसी क्रांति (1917), बर्लिन-दीवार का गिरना (1989), अफगान-संकट (1979-1989), सोवियत संघ का विघटन (1991)।
Q3. सोवियत संघ के विघटन का निम्नलिखित में से कौन-सा परिणाम नहीं है?
Explanation: मध्यपूर्व में संकट सोवियत संघ के विघटन का सीधा परिणाम नहीं था, हालांकि वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव से अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता था।
Q4. मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत संघ में किस प्रकार के सुधारों की शुरुआत की?
Explanation: मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने और राजनीतिक व्यवस्था में कुछ ढील देने के लिए सुधारों की शुरुआत की थी।
Q5. शॉक थेरेपी (Shock Therapy) किस प्रकार का मॉडल था?
Explanation: शॉक थेरेपी साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण के दौरान अपनाई गई एक तीव्र आर्थिक परिवर्तन की नीति थी।
Frequently asked questions
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 'दो ध्रुवीयता का अंत' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में मुख्य रूप से सोवियत संघ के विघटन के कारणों, परिणामों, सोवियत अर्थव्यवस्था की प्रकृति, मिखाइल गोर्बाचेव के सुधारों और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव जैसे विषयों को शामिल किया गया है।
सोवियत अर्थव्यवस्था की पूंजीवादी अर्थव्यवस्था से मुख्य भिन्नता क्या थी?
सोवियत अर्थव्यवस्था में उत्पादन के साधनों पर राज्य का पूर्ण नियंत्रण था, जबकि पूंजीवादी अर्थव्यवस्था में निजी स्वामित्व और बाजार व्यवस्था का प्रभाव था। सोवियत संघ में आर्थिक स्वतंत्रता सीमित थी।
मिखाइल गोर्बाचेव ने सोवियत संघ में सुधार क्यों शुरू किए?
गोर्बाचेव ने सोवियत संघ की गिरती अर्थव्यवस्था, उत्पादन की निम्न गुणवत्ता, और पश्चिमी देशों के साथ पिछड़ने जैसी समस्याओं के कारण सुधार शुरू किए।
शॉक थेरेपी का क्या अर्थ है?
शॉक थेरेपी साम्यवाद से पूंजीवाद की ओर संक्रमण के दौरान अपनाई गई एक आर्थिक नीति थी, जिसमें बाजार अर्थव्यवस्था को तेजी से अपनाने पर जोर दिया गया था।
सोवियत संघ के विघटन का एक प्रमुख परिणाम क्या था?
सोवियत संघ के विघटन का एक प्रमुख परिणाम विश्व-व्यवस्था के शक्ति-संतुलन में बदलाव था, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका एकमात्र महाशक्ति के रूप में उभरा।
इन NCERT समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और महत्वपूर्ण तथ्यों को याद रखने में मदद मिलती है। अभ्यास प्रश्न परीक्षा के पैटर्न को समझने में सहायक होते हैं।
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