कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 5 समकालीन दक्षिण एशिया - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 5, 'समकालीन दक्षिण एशिया' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों जैसे भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव और भूटान की राजनीतिक और भौगोलिक विशेषताओं का वर्णन किया गया है। समाधानों में देशों की पहचान, उनकी राजनीतिक प्रणालियों में स्थिरता और अस्थिरता के कारण, और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है। विशेष रूप से, पाकिस्तान में लोकतंत्रीकरण की चुनौतियों, नेपाल में लोकतंत्र की बहाली की प्रक्रिया, और श्रीलंका के जटिल जातीय संघर्ष का गहन विश्लेषण किया गया है। ये समाधान छात्रों को दक्षिण एशिया की समकालीन राजनीतिक गतिशीलता को समझने में मदद करते हैं और परीक्षा की तैयारी के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | राजनीति विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 5. समकालीन दक्षिण एशिया |
Chapter summary
कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 5 के ये NCERT समाधान समकालीन दक्षिण एशिया के देशों की राजनीतिक और भौगोलिक पहचान पर केंद्रित हैं। इसमें विभिन्न देशों की विशिष्टताओं, जैसे नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र, पाकिस्तान में सैन्य शासन का प्रभाव, श्रीलंका का जातीय संघर्ष, और बांग्लादेश व भूटान की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। समाधान छात्रों को इन देशों की राजनीतिक प्रणालियों, चुनौतियों और क्षेत्रीय संबंधों को समझने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- दक्षिण एशिया के प्रमुख देशों की पहचान करना।
- विभिन्न देशों की राजनीतिक प्रणालियों और उनमें स्थिरता या अस्थिरता के कारणों को समझना।
- पाकिस्तान में लोकतंत्रीकरण की चुनौतियों का विश्लेषण करना।
- नेपाल में लोकतंत्र की बहाली की प्रक्रिया को समझना।
- श्रीलंका के जातीय संघर्ष के कारणों और परिणामों का अध्ययन करना।
- दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय भूमिकाओं को समझना।
Topics covered
Paper topics
- दक्षिण एशिया का परिचय
- भारत की स्थिति
- पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता
- नेपाल में लोकतंत्र की बहाली
- श्रीलंका का जातीय संघर्ष
- बांग्लादेश की स्थिति
- मालदीव की स्थिति
- भूटान की स्थिति
- दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग
- अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की भूमिका
Important topics
- पाकिस्तान में लोकतंत्रीकरण की चुनौतियाँ
- नेपाल में लोकतंत्र की बहाली की प्रक्रिया
- श्रीलंका का जातीय संघर्ष और उसके समाधान के प्रयास
- दक्षिण एशिया के देशों की भौगोलिक और राजनीतिक पहचान
- क्षेत्रीय राजनीति में चीन और अमेरिका की भूमिका
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Questions and Solutions
1. देशों की पहचान करें:
निम्नलिखित कथनों के आधार पर दक्षिण एशिया के देशों की पहचान करें:
- (क) राजतंत्र, लोकतंत्र-समर्थक समूहों और अतिवादियों के बीच संघर्ष के कारण राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण बना।
- (ख) चारों तरफ भूमि से घिरा देश।
- (ग) दक्षिण एशिया के केंद्र में अवस्थित। इस देश की सीमाएँ दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों से मिलती हैं।
- (घ) सेना और लोकतंत्र-समर्थक समूहों के बीच संघर्ष में सेना ने लोकतंत्र के ऊपर बाजी मारी।
- (ङ) दक्षिण एशिया का वह देश जिसने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।
- (च) पहले इस द्वीप में शासन की बागडोर सुल्तान के हाथ में थी। अब यह एक गणतंत्र है।
- (छ) ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था के कारण इस देश को ग़रीबी कम करने में मदद मिली है।
- (ज) एक हिमालयी देश जहाँ संवैधानिक राजतंत्र है। यह देश भी हर तरफ से भूमि से घिरा है।
यहाँ दिए गए कथनों के आधार पर दक्षिण एशिया के देशों की पहचान इस प्रकार है:
- (क) नेपाल: यहाँ राजतंत्र, लोकतंत्र-समर्थक समूहों और अतिवादियों के बीच संघर्ष के कारण राजनीतिक अस्थिरता रही है।
- (ख) नेपाल: यह चारों तरफ से भूमि से घिरा हुआ देश है।
- (ग) भारत: यह दक्षिण एशिया के केंद्र में स्थित है और इसकी सीमाएँ दक्षिण एशिया के अधिकांश देशों से मिलती हैं।
- (घ) पाकिस्तान: यहाँ सेना और लोकतंत्र-समर्थक समूहों के बीच संघर्ष में सेना का प्रभाव अधिक रहा है।
- (ङ) श्रीलंका: इस देश ने दक्षिण एशिया में सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।
- (च) मालदीव: यह एक द्वीप देश है जहाँ पहले सुल्तान का शासन था, और अब यह एक गणतंत्र है।
- (छ) बांग्लादेश: यहाँ ग्रामीण क्षेत्र में छोटी बचत और सहकारी ऋण की व्यवस्था ने गरीबी कम करने में मदद की है।
- (ज) भूटान: यह एक हिमालयी देश है जहाँ संवैधानिक राजतंत्र है और यह भी चारों ओर से भूमि से घिरा हुआ है।
2. दक्षिण एशिया के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
दक्षिण एशिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और गलत कथन की पहचान करें:
- (क) दक्षिण एशिया में सिर्फ़ एक तरह की राजनीतिक प्रणाली चलती है।
- (ख) बांग्लादेश और भारत ने नदी-जल की हिस्सेदारी के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
- (ग) 'साफ्टा' पर हस्ताक्षर इस्लामाबाद के 12वें सार्क-सम्मेलन में हुए।
- (घ) दक्षिण एशिया की राजनीति में चीन और संयुक्त राज्य अमरीका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दिए गए कथनों में से गलत कथन है:
(क) दक्षिण एशिया में सिर्फ़ एक तरह की राजनीतिक प्रणाली चलती है।
यह कथन गलत है क्योंकि दक्षिण एशिया के विभिन्न देशों में अलग-अलग राजनीतिक प्रणालियाँ मौजूद हैं, जैसे लोकतंत्र, सैन्य शासन, संवैधानिक राजतंत्र आदि। उदाहरण के लिए, भारत और श्रीलंका में लोकतंत्र है, जबकि पाकिस्तान में सैन्य शासन का प्रभाव रहा है, और नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र से लोकतंत्र की ओर संक्रमण हुआ है। अन्य कथन (ख), (ग), और (घ) दक्षिण एशिया की वास्तविकताओं को दर्शाते हैं।
3. पाकिस्तान में लोकतंत्रीकरण में कौन-कौन सी कठिनाइयाँ हैं?
पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना और स्थायित्व के मार्ग में आने वाली प्रमुख कठिनाइयों का विस्तृत वर्णन करें।
पाकिस्तान में लोकतंत्रीकरण के रास्ते में कई कठिनाइयाँ रही हैं, जिसके कारण वहाँ लोकतंत्र को स्थायित्व नहीं मिल पाया है। इन कठिनाइयों के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- सैन्य शक्ति का प्रभुत्व: पाकिस्तान में आरंभ से ही सैनिक शक्ति पर नागरिक प्रशासन का प्रभावी नियंत्रण नहीं रहा है। सेना ने कई बार सत्ता पर कब्जा किया है और लोकतंत्र को कमजोर किया है।
- सामाजिक और धार्मिक प्रभाव: देश की सामाजिक व्यवस्था में भूस्वामियों, कट्टरपंथी धार्मिक नेताओं और सेना का दबदबा है। जब भी अवसर मिलता है, सैनिक शक्ति नागरिक प्रशासन पर हावी हो जाती है।
- राजनीतिक दलों की भूमिका: पाकिस्तान के राजनीतिक दल अक्सर शुद्ध राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित नहीं होते, बल्कि उनमें आपसी खींचतान और स्वार्थ हावी रहता है। इसका लाभ सैनिक अधिकारी उठाते हैं और जनता भी इससे त्रस्त हो जाती है।
- भ्रष्टाचार और विकास की उपेक्षा: निर्वाचित सरकारें अक्सर विदेशी सहायता पर निर्भर रहती हैं और देश के सामाजिक-आर्थिक विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं देतीं। भ्रष्टाचार बढ़ता है, जिससे जनता में असंतोष पैदा होता है। सैनिक शक्ति इस स्थिति का लाभ उठाकर स्वच्छ शासन का वादा करती है।
- नागरिक प्रशासन पर नियंत्रण का अभाव: सैनिक हस्तक्षेप के कारण नागरिक प्रशासन की स्वायत्तता और प्रभावशीलता सीमित हो जाती है।
इन कारकों के चलते पाकिस्तान में लोकतंत्र का मार्ग निरंतर चुनौतियों से भरा रहा है।
4. नेपाल के लोग अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने में कैसे सफल हुए?
विस्तार से बताएं कि नेपाल के लोगों ने अपने देश में लोकतंत्र को पुनः स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाए और वे किस प्रकार सफल हुए।
नेपाल के लोगों ने अपने देश में लोकतंत्र को बहाल करने के लिए एक लंबा और संघर्षपूर्ण मार्ग तय किया। इसकी प्रक्रिया इस प्रकार रही:
- संवैधानिक राजतंत्र और राजा का हस्तक्षेप: नेपाल में लंबे समय तक संवैधानिक राजतंत्र रहा। इस दौरान राजनीतिक पार्टियों और जनता ने अधिक खुले और उत्तरदायी शासन की मांग की। हालाँकि, राजा ने सेना की मदद से शासन पर पूर्ण नियंत्रण कर लिया और लोकतंत्र की राह अवरुद्ध कर दी।
- लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन और 1990 का संविधान: 1990 में, एक मजबूत लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन के दबाव में, राजा ने नए लोकतांत्रिक संविधान की मांग को स्वीकार कर लिया। हालाँकि, इसके बाद भी लोकतांत्रिक सरकारों का कार्यकाल समस्याओं से भरा रहा।
- माओवादी विद्रोह और त्रिकोणीय संघर्ष: 1990 के दशक में, नेपाल के माओवादियों ने राजा और सत्ताधारी अभिजन के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह शुरू किया। इससे राजा की सेना, लोकतंत्र-समर्थकों और माओवादियों के बीच एक त्रिकोणीय संघर्ष छिड़ गया।
- राजा द्वारा संसद भंग करना: 2002 में, राजा ने संसद को भंग कर दिया और सरकार को गिरा दिया, जिससे देश में जो कुछ भी लोकतंत्र बचा था, वह भी समाप्त हो गया।
- अप्रैल 2006 का जन आंदोलन: अप्रैल 2006 में, देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शन हुए। इस अहिंसक प्रतिरोध का नेतृत्व सात दलों के गठबंधन (सेवेन पार्टी अलाएंस), माओवादियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया।
- संसद की बहाली और राजतंत्र का अंत: इस आंदोलन की सफलता के फलस्वरूप, राजा ज्ञानेन्द्र को संसद बहाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके बाद नेपाल में राजतंत्र समाप्त हो गया और लोकतंत्र की स्थापना हुई। वर्तमान में, नेपाल एक संविधान-सभा के गठन की दिशा में कदम बढ़ा रहा है जो देश का नया संविधान लिखेगी।
इस प्रकार, जन आंदोलनों और विभिन्न राजनीतिक शक्तियों के संयुक्त प्रयासों से नेपाल में लोकतंत्र बहाल करने में सफलता मिली।
5. श्रीलंका के जातीय-संघर्ष में किनकी भूमिका प्रमुख है?
श्रीलंका में चल रहे जातीय संघर्ष के प्रमुख कारणों और इसमें शामिल मुख्य समुदायों की भूमिका का विश्लेषण करें।
श्रीलंका में जातीय संघर्ष एक जटिल और लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा है, जिसमें मुख्य रूप से दो समुदायों की भूमिका प्रमुख है:
- सिंहली समुदाय: यह श्रीलंका की बहुसंख्यक आबादी (लगभग 82%) है और मुख्य रूप से बौद्ध धर्म का पालन करती है। स्वतंत्रता के बाद से, सिंहलियों ने श्रीलंका को एक एकात्मक राज्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है, जहाँ सिंहली भाषा और संस्कृति को प्राथमिकता दी जाती है। उनका मानना है कि श्रीलंका सिंहलियों का देश है और तमिल लोग विदेशी हैं, इसलिए उन्हें शासन और राजनीतिक संस्थाओं में सीमित अधिकार मिलने चाहिए।
- तमिल समुदाय: इसमें दो मुख्य समूह शामिल हैं - श्रीलंका के मूल तमिल (लगभग 13%) और भारत से आए तमिल (लगभग 5%)। तमिल समुदाय मुख्य रूप से हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्म का पालन करता है। वे सिंहलियों के एकात्मक राज्य के विचार का विरोध करते हैं और अपने लिए अधिक स्वायत्तता या एक अलग राज्य ('तमिल ईलम') की मांग करते रहे हैं।
संघर्ष की भूमिका:
- सिंहलियों की भूमिका: सिंहली नेतृत्व ने तमिलों को राजनीतिक और सांस्कृतिक अधिकारों से वंचित करने वाली नीतियां अपनाईं, जैसे सिंहली को एकमात्र राजभाषा बनाना। इससे तमिलों में अलगाव की भावना बढ़ी।
- तमिलों की भूमिका: तमिलों ने अपने अधिकारों के लिए विरोध प्रदर्शन किए और अंततः, लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) जैसे संगठनों ने सशस्त्र संघर्ष शुरू कर दिया। LTTE ने तमिल ईलम की मांग को लेकर श्रीलंकाई सेनाओं से लड़ाई लड़ी।
- भारत की भूमिका: भारत, विशेषकर तमिलनाडु के दबाव में, श्रीलंका के जातीय संघर्ष में हस्तक्षेप करने की कोशिश की। 1987 में भारत ने शांति सेना भेजी, लेकिन यह सफल नहीं हुई और बाद में वापस बुला ली गई।
- अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप: नॉर्वे जैसे अन्य देशों ने भी शांति स्थापित करने के प्रयास किए हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
यह संघर्ष श्रीलंका के लिए गंभीर संकट और गृहयुद्ध का कारण बना है, हालाँकि देश में लोकतांत्रिक शासन और अच्छी अर्थव्यवस्था बनी हुई है।
Common mistakes
- देशों की भौगोलिक और राजनीतिक विशेषताओं को गलत पहचानना।
- राजनीतिक अस्थिरता के कारणों को सतही तौर पर समझना।
- श्रीलंका के जातीय संघर्ष की जटिलताओं को नजरअंदाज करना।
- पाकिस्तान में लोकतंत्र की चुनौतियों को कम आंकना।
Revision tips
- प्रत्येक देश की प्रमुख राजनीतिक और भौगोलिक विशेषताओं को सूचीबद्ध करें।
- पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में राजनीतिक उथल-पुथल के कारणों पर विशेष ध्यान दें।
- क्षेत्रीय संगठनों और अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की भूमिका को समझें।
- समाधानों में दिए गए ऐतिहासिक संदर्भों को याद रखें।
Practice MCQs
Q1. दक्षिण एशिया के किस देश में संवैधानिक राजतंत्र है और यह चारों ओर से भूमि से घिरा हुआ है?
Explanation: नेपाल एक हिमालयी देश है जहाँ संवैधानिक राजतंत्र है और यह चारों ओर से भूमि से घिरा हुआ है, जैसा कि समाधान में बताया गया है।
Q2. श्रीलंका में मुख्य जनसंख्या किस समुदाय की है और उनका प्रमुख धर्म क्या है?
Explanation: श्रीलंका में बहुसंख्यक सिंहली समुदाय है जो मुख्य रूप से बौद्ध धर्म का पालन करता है, जैसा कि समाधान में उल्लेखित है।
Q3. पाकिस्तान में लोकतंत्रीकरण के मार्ग में मुख्य बाधा क्या रही है?
Explanation: समाधान के अनुसार, पाकिस्तान में सैन्य शक्ति का नागरिक प्रशासन पर नियंत्रण और उसका प्रभाव लोकतंत्रीकरण की राह में एक प्रमुख बाधा रहा है।
Q4. किस दक्षिण एशियाई देश ने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया?
Explanation: समाधान में बताया गया है कि श्रीलंका दक्षिण एशिया का वह देश है जिसने सबसे पहले अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया।
Q5. नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के लिए 2006 में हुए आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?
Explanation: अप्रैल 2006 में नेपाल में हुए देशव्यापी लोकतंत्र-समर्थक प्रदर्शनों का नेतृत्व सात दलों के गठबंधन, माओवादियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया था।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 12 के राजनीति विज्ञान विषय के लिए है, विशेष रूप से अध्याय 5 'समकालीन दक्षिण एशिया' पर केंद्रित है।
इन समाधानों में किन देशों पर मुख्य रूप से चर्चा की गई है?
इन समाधानों में दक्षिण एशिया के प्रमुख देशों जैसे भारत, पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव और भूटान की राजनीतिक और भौगोलिक विशेषताओं पर चर्चा की गई है।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं क्योंकि ये प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तार से समझाते हैं और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं।
श्रीलंका के जातीय संघर्ष का मुख्य कारण क्या है?
श्रीलंका में जातीय संघर्ष का मुख्य कारण सिंहली बहुसंख्यकों और तमिल अल्पसंख्यकों के बीच भाषा, धर्म और राजनीतिक अधिकारों को लेकर मतभेद है, जिसमें सिंहलियों का मानना है कि तमिल लोग विदेशी हैं।
पाकिस्तान में लोकतंत्र को स्थापित करने में क्या कठिनाइयाँ हैं?
पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना में मुख्य कठिनाइयाँ सैन्य शासन का प्रभाव, नागरिक प्रशासन पर नियंत्रण की कमी, सामाजिक व्यवस्था में भूस्वामियों और धार्मिक नेताओं का दबदबा, और राजनीतिक दलों के बीच आपसी खींचतान हैं।
नेपाल में लोकतंत्र की बहाली कैसे हुई?
नेपाल में लोकतंत्र की बहाली एक लंबे संघर्ष का परिणाम थी, जिसमें लोकतंत्र-समर्थक आंदोलनों, सात दलों के गठबंधन और माओवादियों के दबाव के कारण राजा को संसद बहाल करनी पड़ी और अंततः राजतंत्र समाप्त हुआ।
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