कक्षा 12 राजनीति विज्ञान: अध्याय 8 पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8, 'पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंताओं के कारणों, पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो सम्मेलन के परिणामों, 'विश्व की सांझी विरासत' की अवधारणा, और 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' के सिद्धांत जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधान छात्रों को पर्यावरण संरक्षण में विभिन्न देशों की भूमिकाओं और वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों को हल करने के लिए आवश्यक सहयोग को समझने में मदद करते हैं। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ के लिए एक मूल्यवान संसाधन हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectराजनीति विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter8. पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

Chapter summary

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8 के ये NCERT समाधान पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं पर केंद्रित हैं। इसमें पर्यावरण क्षरण के कारणों, पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो सम्मेलन जैसे अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों, 'विश्व की सांझी विरासत' की व्याख्या, और 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' के सिद्धांत का विश्लेषण शामिल है। समाधान छात्रों को वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान के लिए आवश्यक सहयोग को समझने में सहायता करते हैं।

Learning outcomes

  • पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंताओं के कारणों को समझना।
  • पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो सम्मेलन के महत्व और परिणामों का विश्लेषण करना।
  • 'विश्व की सांझी विरासत' की अवधारणा और इसके प्रबंधन की चुनौतियों को स्पष्ट करना।
  • 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' के सिद्धांत के अर्थ और अनुप्रयोग को समझना।
  • वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता का मूल्यांकन करना।

Topics covered

Paper topics

  • पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंताएँ
  • मानवीय गतिविधियाँ और पर्यावरण पर प्रभाव
  • पृथ्वी शिखर सम्मेलन (1992)
  • रियो डी जिनेरियो सम्मेलन के परिणाम
  • विश्व की सांझी विरासत (Global Commons)
  • वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह, बाहरी अंतरिक्ष
  • साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ (Common but Differentiated Responsibilities)
  • टिकाऊ विकास (Sustainable Development)
  • पर्यावरण संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग
  • उत्तरी और दक्षिणी देशों के बीच मतभेद

Important topics

  • विश्व की सांझी विरासत की अवधारणा
  • साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ का सिद्धांत
  • रियो सम्मेलन के परिणाम और टिकाऊ विकास
  • पर्यावरण क्षरण के कारण और समाधान
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकारों का क्या कारण है? निम्नलिखित में सबसे बेहतर विकल्प चुनें।
  • (क) विकसित देश प्रकृति की रक्षा को लेकर चिंतित हैं।
  • (ख) पर्यावरण की सुरक्षा मूलवासी लोगों और प्राकृतिक पर्यावासों के लिए जरूरी है।
  • (ग) मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण को व्यापक नुकसान हुआ है और यह नुकसान ख़तरे की हद तक पहुँच गया है।
  • (घ) इनमें से कोई नहीं।
Solution:

पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकारों का सबसे प्रमुख कारण मानवीय गतिविधियों द्वारा पर्यावरण को पहुँचाया गया व्यापक नुकसान है। पिछले कुछ दशकों में, औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अनियंत्रित दोहन के कारण वायु, जल और भूमि प्रदूषण में खतरनाक वृद्धि हुई है। वनों की कटाई, जैव विविधता का क्षरण, और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ अब वैश्विक चिंता का विषय बन गई हैं। ये सभी मुद्दे सीधे तौर पर मानवीय कार्यों का परिणाम हैं और इन्होंने पर्यावरण को एक ऐसी स्थिति में पहुँचा दिया है जहाँ इसके दीर्घकालिक परिणाम मानव अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं। इसलिए, विकल्प (ग) सबसे सटीक उत्तर है।

प्रश्न 2

निम्नलिखित कथनों में प्रत्येक के आगे सही या ग़लत का चिह्न लगायें। ये कथन पृथ्वी-सम्मेलन के बारे में हैं –
  • (क) इसमें 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया।
  • (ख) यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्रसंघ के तत्वावधान में हुआ।
  • (ग) वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों ने पहली बार राजनीतिक धरातल पर ठोस आकार ग्रहण किया।
  • (घ) यह महासम्मेलनी बैठक थी।
Solution:

पृथ्वी शिखर सम्मेलन (जिसे रियो सम्मेलन भी कहा जाता है) के संबंध में दिए गए कथनों का मूल्यांकन इस प्रकार है:

  1. (क) इसमें 170 देश, हजारों स्वयंसेवी संगठन तथा अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया। - सही। इस सम्मेलन में 170 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ बड़ी संख्या में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने भी भाग लिया था।
  2. (ख) यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्रसंघ के तत्वावधान में हुआ। - सही। यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र संघ के पर्यावरण और विकास पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण आयोजन था।
  3. (ग) वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों ने पहली बार राजनीतिक धरातल पर ठोस आकार ग्रहण किया। - सही। इस सम्मेलन ने वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों को अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के एजेंडे पर प्रमुखता से स्थापित किया और उन पर ठोस कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाए।
  4. (घ) यह महासम्मेलनी बैठक थी। - गलत। यद्यपि यह एक महत्वपूर्ण सम्मेलन था, इसे केवल 'महासम्मेलनी बैठक' कहना इसके महत्व को सीमित करता है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन था जिसका उद्देश्य पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर ठोस निर्णय लेना था।

प्रश्न 3

'विश्व की सांझी विरासत' के बारे में निम्नलिखित में कौन-से कथन सही हैं?
  • (क) धरती का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष को 'विश्व की सांझी विरासत' माना जाता है।
  • (ख) 'विश्व की सांझी विरासत' किसी राज्य के संप्रभु क्षेत्राधिकार में नहीं आते।
  • (ग) 'विश्व की सांझी विरासत' के प्रबंधन के सवाल पर उत्तरी और दक्षिणी देशों के बीच मतभेद है।
  • (घ) उत्तरी गोलार्ध के देश 'विश्व की सांझी विरासत' को बचाने के लिए दक्षिणी गोलार्ध के देशों से कहीं ज्यादा चितित हैं।
Solution:

'विश्व की सांझी विरासत' (Global Commons) के संबंध में सही कथन निम्नलिखित हैं:

  1. (क) धरती का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष को 'विश्व की सांझी विरासत' माना जाता है। - सही। ये वे क्षेत्र हैं जो किसी एक राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते और जिनका उपयोग सभी के लिए खुला है।
  2. (ख) 'विश्व की सांझी विरासत' किसी राज्य के संप्रभु क्षेत्राधिकार में नहीं आते। - सही। चूँकि ये क्षेत्र किसी एक देश की सीमा में नहीं हैं, इसलिए उन पर किसी एक राज्य का संप्रभु अधिकार नहीं होता।
  3. (ग) 'विश्व की सांझी विरासत' के प्रबंधन के सवाल पर उत्तरी और दक्षिणी देशों के बीच मतभेद है। - सही। इन साझा संसाधनों के उपयोग, संरक्षण और प्रबंधन को लेकर विकसित (उत्तरी) और विकासशील (दक्षिणी) देशों के बीच अक्सर मतभेद पाए जाते हैं, खासकर संसाधनों के बँटवारे और जिम्मेदारी को लेकर।
  4. (घ) उत्तरी गोलार्ध के देश 'विश्व की सांझी विरासत' को बचाने के लिए दक्षिणी गोलार्ध के देशों से कहीं ज्यादा चितित हैं। - गलत। यह कथन सामान्यीकरण करता है और सभी देशों की चिंताओं को सटीक रूप से नहीं दर्शाता। जबकि विकसित देशों की अपनी चिंताएँ हो सकती हैं, विकासशील देश भी इन संसाधनों पर अपनी निर्भरता और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इनके संरक्षण को लेकर चिंतित हैं।

प्रश्न 4

रियो सम्मेलन के क्या परिणाम हुए?
Solution:

1992 में ब्राजील के रियो डी जिनेरियो में आयोजित पृथ्वी शिखर सम्मेलन (रियो सम्मेलन) के कई महत्वपूर्ण परिणाम हुए, जिन्होंने वैश्विक पर्यावरण नीति को आकार दिया:

  1. पर्यावरणीय समस्या की गंभीरता की स्वीकृति: सम्मेलन ने यह स्वीकार किया कि पर्यावरण संरक्षण एक गंभीर और वैश्विक समस्या है जिसके तत्काल समाधान की आवश्यकता है।
  2. साझी जिम्मेदारी का सिद्धांत: यह दृष्टिकोण स्वीकार किया गया कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सभी देशों की साझी है, न कि केवल विकसित देशों की।
  3. विकासशील देशों के लिए टिकाऊ विकास पर जोर: यह निश्चित किया गया कि विकासशील देशों को ऐसे विकास के तौर-तरीके अपनाने चाहिएँ जिनसे टिकाऊ विकास (Sustainable Development) की प्राप्ति हो। टिकाऊ विकास का अर्थ है ऐसा विकास जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे बिना भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता से समझौता करे।
  4. विकसित देशों की भूमिका: यह भी तय हुआ कि विकसित देशों को अपनी विकास गतिविधियों पर कुछ अंकुश लगाना चाहिए क्योंकि वे पहले ही विकास के एक निश्चित स्तर तक पहुँच चुके हैं और उन्होंने पर्यावरण पर अधिक प्रभाव डाला है।
  5. साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ: सम्मेलन ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी देशों की साझी जिम्मेदारी को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी माना कि प्रत्येक देश की भूमिका उसकी क्षमता और ऐतिहासिक योगदान के आधार पर अलग-अलग होगी।
  6. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा: सम्मेलन ने पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और समझौते की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रश्न 5

'विश्व की सांझी विरासत' का क्या अर्थ है? इसका दोहन और प्रदूषण कैसे होता है?
Solution:

'विश्व की सांझी विरासत' (Global Commons) का अर्थ उन प्राकृतिक संसाधनों या क्षेत्रों से है जो किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर हैं और जिन पर किसी एक व्यक्ति या राष्ट्र का नहीं, बल्कि पूरे समुदाय या मानवता का अधिकार होता है। इन्हें 'वैश्विक संपदा' भी कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह (खुला समुद्र) और बाहरी अंतरिक्ष शामिल हैं।

दोहन और प्रदूषण:

इन वैश्विक संपदाओं का दोहन और प्रदूषण एक जटिल समस्या है क्योंकि इनके प्रबंधन पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग स्थापित करना कठिन होता है। इसके मुख्य कारण और तरीके निम्नलिखित हैं:

  1. अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्य और समय-सीमा पर मतभेद: अक्सर पर्यावरणीय मुद्दों से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य पूरी तरह पुष्ट नहीं होते या उनके प्रभाव की समय-सीमा को लेकर देशों में मतभेद होते हैं, जिससे एक समान पर्यावरणीय एजेंडे पर सहमति बनाना मुश्किल हो जाता है।
  2. उत्तरी और दक्षिणी देशों के बीच असमानता: बाहरी अंतरिक्ष या समुद्री संसाधनों के प्रबंधन पर उत्तरी (विकसित) और दक्षिणी (विकासशील) गोलार्ध के देशों के बीच मौजूद आर्थिक और तकनीकी असमानता का असर पड़ता है। विकसित देश अक्सर इन संसाधनों का अधिक दोहन करते हैं या ऐसी प्रौद्योगिकियों का उपयोग करते हैं जिनके लाभ सभी को समान रूप से नहीं मिलते।
  3. प्रौद्योगिकी और औद्योगिक विकास का प्रभाव: बाहरी अंतरिक्ष में उपग्रहों की स्थापना, समुद्री संसाधनों का खनन, या वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन जैसी गतिविधियाँ सीधे तौर पर प्रौद्योगिकी और औद्योगिक विकास से जुड़ी हैं। इन गतिविधियों के फायदे और नुकसान का वितरण अक्सर असमान होता है, जिससे प्रदूषण और दोहन की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। उदाहरण के लिए, ओजोन परत में छेद की खोज और अंटार्कटिका के ऊपर इसके प्रभाव ने वैश्विक चिंताएँ बढ़ाई हैं।
  4. अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का सीमित प्रभाव: यद्यपि अंटार्कटिका संधि (1959), मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) और अंटार्कटिक पर्यावरणीय प्रोटोकॉल (1991) जैसे महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, फिर भी इन समझौतों का प्रभावी कार्यान्वयन और अनुपालन सुनिश्चित करना एक चुनौती बनी हुई है।

प्रश्न 6

'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' से क्या अभिप्राय है? हम इस विचार को कैसे लागू कर सकते हैं?
Solution:

'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' (Common but Differentiated Responsibilities - CBDR) का सिद्धांत यह मानता है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी सभी देशों की है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से जिन देशों ने पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुँचाया है (मुख्यतः विकसित देश) और जिनके पास संसाधनों की अधिकता है, उनकी जिम्मेदारी अधिक है। वहीं, विकासशील देशों की जिम्मेदारी भी है, लेकिन उनकी क्षमता और विकास की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनकी भूमिका अलग होगी।

इस विचार को लागू करने के तरीके:

  1. विकसित देशों द्वारा वित्तीय और तकनीकी सहायता: विकसित देश विकासशील देशों को पर्यावरण-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण और टिकाऊ विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर सकते हैं।
  2. उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य: विकसित देशों को अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लिए अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए, क्योंकि उन्होंने ऐतिहासिक रूप से अधिक उत्सर्जन किया है।
  3. विकासशील देशों के लिए लचीलापन: विकासशील देशों को गरीबी उन्मूलन और आर्थिक विकास के लिए कुछ छूट दी जानी चाहिए, बशर्ते कि वे अपने विकास को टिकाऊ बनाने के प्रयास करें।
  4. अंतर्राष्ट्रीय समझौतों में कार्यान्वयन: जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय समझौतों (जैसे पेरिस समझौता) में इस सिद्धांत को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना चाहिए और इसके कार्यान्वयन की निगरानी की जानी चाहिए।
  5. क्षमता निर्माण: विकासशील देशों में पर्यावरण प्रबंधन और टिकाऊ प्रथाओं को अपनाने के लिए क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान करना।
  6. साझा अनुसंधान और विकास: पर्यावरण की समस्याओं के समाधान के लिए संयुक्त अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना, जिसमें सभी देश योगदान दें।

1992 के रियो पृथ्वी शिखर सम्मेलन में इस सिद्धांत को प्रमुखता से स्वीकार किया गया था, जो पर्यावरण संरक्षण में वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

Common mistakes

  • पर्यावरण क्षरण के कारणों को केवल विकसित देशों की गतिविधियों तक सीमित समझना।
  • 'विश्व की सांझी विरासत' के प्रबंधन में उत्तरी और दक्षिणी देशों के बीच मतभेदों को नजरअंदाज करना।
  • रियो सम्मेलन के परिणामों को केवल एक सामान्य बैठक के रूप में देखना, न कि ठोस निर्णयों के रूप में।
  • 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' के सिद्धांत को समान जिम्मेदारी के रूप में समझना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें।
  • 'विश्व की सांझी विरासत' और 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' जैसी प्रमुख अवधारणाओं को उदाहरणों सहित समझें।
  • रियो सम्मेलन और पृथ्वी शिखर सम्मेलन के परिणामों को सूचीबद्ध करें और उनके महत्व को समझें।
  • पर्यावरण संरक्षण में विभिन्न देशों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करें।

Practice MCQs

Q1. पर्यावरण के प्रति बढ़ते सरोकारों का मुख्य कारण क्या है?

Q2. पृथ्वी शिखर सम्मेलन (1992) में कितने देशों ने भाग लिया था?

Q3. निम्नलिखित में से किसे 'विश्व की सांझी विरासत' माना जाता है?

Q4. रियो सम्मेलन में किस प्रकार के विकास पर जोर दिया गया?

Q5. 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' का सिद्धांत क्या दर्शाता है?

Frequently asked questions

कक्षा 12 राजनीति विज्ञान के अध्याय 8 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

अध्याय 8 'पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन' में पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंताओं के कारण, पृथ्वी शिखर सम्मेलन और रियो सम्मेलन के परिणाम, 'विश्व की सांझी विरासत' की अवधारणा, और 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' के सिद्धांत जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।

पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंताओं का मुख्य कारण क्या है?

पर्यावरण के प्रति बढ़ती चिंताओं का मुख्य कारण मानवीय गतिविधियों से पर्यावरण को हुआ व्यापक नुकसान है, जो अब खतरे की हद तक पहुँच गया है।

'विश्व की सांझी विरासत' से क्या तात्पर्य है?

'विश्व की सांझी विरासत' उन संसाधनों या क्षेत्रों को कहा जाता है जो किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं और जिन पर पूरे समुदाय का अधिकार होता है, जैसे कि पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष।

रियो सम्मेलन (1992) के मुख्य परिणाम क्या थे?

रियो सम्मेलन के मुख्य परिणामों में पर्यावरण संरक्षण की गंभीरता को स्वीकार करना, पर्यावरण सुरक्षा की साझी जिम्मेदारी को मानना, टिकाऊ विकास की धारणा पर जोर देना, और 'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' के सिद्धांत को अपनाना शामिल था।

'साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ' के सिद्धांत को कैसे लागू किया जा सकता है?

इस सिद्धांत को लागू करने के लिए, सभी देशों को पर्यावरण संरक्षण में अपनी क्षमता और ऐतिहासिक योगदान के आधार पर अलग-अलग भूमिकाएँ निभानी होंगी, जबकि जिम्मेदारी सभी की साझी होगी।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों का उत्तर देने में मदद मिलती है।

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